कोटा के बाद अब बीकानेर में सिस्टम ‘फेल’: सी-सेक्शन के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी खराब, वेंटिलेटर पर मातृत्व

Written by : Sanjay kumar

बीकानेर, 9 जून 2026
बीकानेर। राजस्थान में सुरक्षित मातृत्व और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के सरकारी दावों के बीच एक अत्यंत गंभीर चिकित्सा घटना सामने आई है। बीकानेर स्थित पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी (सी-सेक्शन) के बाद छह प्रसूताओं की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। इन महिलाओं में किडनी फेल (Acute Kidney Injury) जैसी जटिल स्थिति विकसित होने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कर डायलिसिस पर रखा गया है। 20 से 27 वर्ष आयु वर्ग की इन नवमाताओं की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।

चिकित्सकीय जटिलताएं और संभावित कारणों की जांच

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सी-सेक्शन के बाद इस प्रकार की स्थिति आमतौर पर गंभीर संक्रमण (सेप्सिस), अत्यधिक रक्तस्राव, एनेस्थीसिया संबंधी जटिलताओं, या पोस्ट-ऑपरेटिव इंफेक्शन कंट्रोल में कमी के कारण उत्पन्न हो सकती है। कई मामलों में समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम (MODS) जैसी स्थिति भी विकसित हो जाती है, जो जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
वर्तमान मामले में भी मरीजों में यूरिन आउटपुट कम होना, प्लेटलेट्स में गिरावट और अंगों के कार्य प्रभावित होने जैसे लक्षण सामने आए हैं, जिन्हें चिकित्सकीय रूप से गंभीर संकेत माना जाता है।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ती स्थिति और परिजनों के आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन के बाद कुछ ही समय में प्रसूताओं की हालत बिगड़ने लगी। फलौदी निवासी प्रीति सहित सभी छह महिलाओं का उपचार पीबीएम अस्पताल के आईसीयू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। परिजनों का आरोप है कि शुरुआती लक्षणों के बावजूद समय पर प्रभावी उपचार नहीं दिया गया तथा अस्पताल में संसाधनों और देखरेख की कमी के कारण स्थिति गंभीर होती चली गई।
वार्डों में सफाई व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और गर्मी में कूलिंग सिस्टम की खराब स्थिति को लेकर भी असंतोष जताया गया है, जिससे अस्पताल की व्यवस्थागत तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न

यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि हाल के दिनों में विभिन्न जिलों से सामने आ रहे ऐसे मामलों की श्रृंखला का हिस्सा प्रतीत होती है, जिनमें प्रसूता सुरक्षा और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सरकारी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल, स्टाफ ट्रेनिंग और समय पर मॉनिटरिंग सिस्टम की प्रभावशीलता पर पुनर्विचार आवश्यक है।

अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया

पीबीएम अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीर बताते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आकलन में इसे संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव या अन्य जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच समिति गठित की गई है, जो ऑपरेशन थिएटर प्रोटोकॉल, पोस्ट-ऑपरेटिव केयर, दवाओं के उपयोग और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था की विस्तृत जांच करेगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेही पर उठते सवाल

यह मामला केवल चिकित्सा जटिलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही, अस्पताल प्रबंधन की क्षमता और मरीज सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि सिस्टम ऑडिट और प्रक्रिया सुधार भी अनिवार्य होना चाहिए।

आवश्यक कार्रवाई की मांग

यह घटना कई परिवारों के लिए गहरी त्रासदी है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल है। आवश्यकता इस बात की है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या प्रोटोकॉल उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और आमजन का स्वास्थ्य प्रणाली पर विश्वास मजबूत हो सके।

Pramukh Samvad

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