पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट रुख, 15 अप्रैल की समय सीमा बरकरार

Written by : Sanjay kumar

याचिका खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा—यदि समयसीमा का उल्लंघन हो तो याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं

जयपुर, 12 मार्च 2026
राजस्थान में पंचायत एवं निकाय चुनावों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया को 15 अप्रैल तक पूरा कराने की निर्धारित समयसीमा यथावत रहेगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने बिहारीलाल रणवा एवं अन्य द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को निरस्त करते हुए यह आदेश पारित किया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकुर रस्तोगी ने न्यायालय को बताया कि राज्य सरकार ने पंचायत-निकाय चुनाव की प्रक्रिया 15 अप्रैल तक पूर्ण कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन इसमें अनावश्यक विलंब किया जा रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि न्यायालय निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव सम्पन्न कराने के निर्देश दे।

वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि वह इस प्रकरण में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। हालांकि यदि चुनाव प्रक्रिया से संबंधित समयसीमा अथवा निर्देशों का उल्लंघन होता है, तो याचिकाकर्ता इस विषय को उपयुक्त मंच, विशेषकर राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष उठाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 14 नवम्बर 2025 को कुल 439 याचिकाओं का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार को 31 दिसम्बर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूर्ण करने तथा 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत-निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने विभिन्न आदेशों में इसी समयसीमा के भीतर चुनाव सम्पन्न कराने की बात दोहराई है।

इस निर्णय के साथ ही राज्य में पंचायत एवं निकाय चुनावों को लेकर निर्धारित समयसीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

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