2.43 करोड़ का महाघूसकांड: छत से फेंके गए नोटों के कट्टे, टॉयलेट से निकला करोड़ों का कैश

Written by : Sanjay kumar

नकली बीज कार्रवाई से शुरू हुआ पूरा मामला

जयपुर, 10 जून। राजस्थान में कृषि विभाग से जुड़े कथित 2.43 करोड़ रुपये के महाघूसकांड ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में करोड़ों रुपये की नकदी बरामद होने, राजस्थान राज्य बीज निगम के पूर्व अशासकीय निदेशक जुगल किशोर विश्नोई समेत कई लोगों की गिरफ्तारी और FIR में दर्ज बातचीतों ने मामले को प्रदेश के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में शामिल कर दिया है।

कैसे सामने आया घूसकांड

मामले की शुरुआत तब हुई जब कृषि विभाग ने मूंगफली बीजों की गुणवत्ता और भंडारण को लेकर कार्रवाई शुरू की। विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर बीजों के नमूने लिए गए और बड़ी मात्रा में बीज जब्त किए गए। इसी दौरान कथित रूप से कार्रवाई को प्रभावित करने, सीज माल को राहत दिलाने और संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने के लिए करोड़ों रुपये की डील होने की सूचना ACB तक पहुंची। इसके बाद एजेंसी ने तकनीकी निगरानी और गोपनीय जांच शुरू की।

ACB की कार्रवाई में खुलीं परतें

जांच के दौरान ACB ने कई स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई में राजस्थान राज्य बीज निगम के पूर्व अशासकीय निदेशक जुगल किशोर विश्नोई सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि कथित घूस के लेन-देन और प्रभावशाली लोगों तक पहुंच रखने वाले नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।

छत से फेंके गए नोटों के कट्टे

बीकानेर में जुगल किशोर विश्नोई के ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान कथित रूप से नोटों से भरे दो प्लास्टिक के कट्टे घर की छत से पीछे खाली प्लॉट में फेंक दिए गए। ACB ने जब कट्टों को बरामद किया तो उनमें बैंक पासबुक, चेकबुक और करीब 45 लाख 56 हजार रुपये नकद मिले। इस बरामदगी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया।

टॉयलेट से मिला एक करोड़ से अधिक कैश

कार्रवाई के दौरान एक पड़ोसी की सूचना पर ACB टीम ने एक मकान के टॉयलेट में रखे प्लास्टिक के कट्टे की जांच की। उसमें 500-500 रुपये के नोटों में करीब 1 करोड़ 1 लाख 48 हजार रुपये से अधिक नकद राशि बरामद हुई। अन्य स्थानों से मिली रकम को जोड़कर कुल बरामदगी 2 करोड़ 44 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

FIR में दर्ज हैं गंभीर आरोप

ACB की FIR के अनुसार करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य के सीज बीजों को वापस भेजने और संबंधित लोगों को राहत दिलाने के बदले कथित रूप से करोड़ों रुपये की घूस लेने का आरोप है। मामले में जुगल किशोर विश्नोई सहित कई लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।

बातचीत के अंशों से बढ़ा राजनीतिक विवाद

FIR में दर्ज कथित बातचीतों में रकम के बंटवारे, भुगतान व्यवस्था और अधिकारियों तक पैसे पहुंचाने जैसी चर्चाओं का उल्लेख बताया गया है। कुछ बातचीतों में “डॉक्टर साहब”, “मंत्री जी” और “सतीश” जैसे संदर्भ सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी मंत्री या वरिष्ठ राजनीतिक पदाधिकारी को आरोपी घोषित नहीं किया है।

सैंपल जांच पर भी उठे सवाल

जांच में सामने आई कथित फोन वार्ताओं में बीजों के सैंपल परीक्षण और लैब रिपोर्ट को प्रभावित करने जैसी चर्चाओं का भी उल्लेख है। इसी कारण अब जांच केवल नकदी और कथित घूस तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सैंपल जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता भी जांच के दायरे में आ गई है।

कांग्रेस का हमला, इस्तीफे की मांग

मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने FIR की प्रतियां सार्वजनिक करते हुए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि FIR में दर्ज संवादों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विपक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से उच्च स्तरीय जांच कराने तथा कृषि मंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफा लेने की मांग की है।

मंत्री ने आरोपों को बताया निराधार

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यदि उनके खिलाफ कोई आरोप सिद्ध होता है तो वे पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा

ACB अब बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, वित्तीय लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित घूस की राशि किन लोगों तक पहुंची, किस उद्देश्य से एकत्र की गई और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल थे। जांच एजेंसी के अनुसार आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

पूरे प्रदेश की नजर जांच पर

2.43 करोड़ रुपये की बरामदगी, छत से फेंके गए नोटों के कट्टे, टॉयलेट से मिला करोड़ों का कैश, FIR में दर्ज चर्चित संवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इस मामले को राजस्थान के सबसे चर्चित कथित भ्रष्टाचार मामलों में शामिल कर दिया है। अब पूरे प्रदेश की नजर ACB की आगामी कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई है।

Pramukh Samvad

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