Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 26 मार्च 2026
मेडिकल सिस्टम में सेंध: बड़ा रैकेट बेनकाब
राजस्थान में स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला बड़ा खुलासा सामने आया है, जहां स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह संगठित गिरोह विदेश से एमबीबीएस करने वाले लेकिन FMGE परीक्षा में असफल अभ्यर्थियों को नकली दस्तावेजों के माध्यम से डॉक्टर बनाकर सिस्टम में प्रवेश दिला रहा था, जिससे आम जनता की जान के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा था।
अपराध का तरीका: फेल अभ्यर्थियों को बनाया ‘डॉक्टर’
जांच में सामने आया कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था। सबसे पहले विदेश से पढ़कर लौटे ऐसे छात्रों को चिन्हित किया जाता था जो FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाते थे। इसके बाद फर्जी पासिंग सर्टिफिकेट तैयार किए जाते और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में उनका पंजीकरण कराया जाता। पंजीकरण के बाद इन लोगों को अस्पतालों में इंटर्नशिप और प्रैक्टिस की अनुमति दिला दी जाती, जिससे वे पूरी तरह वैध डॉक्टर प्रतीत होते थे।
पैसों का खेल: लाखों में बिक रही थी डिग्री
इस रैकेट के जरिए एक व्यक्ति से 20 से 25 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि इस राशि का बंटवारा नेटवर्क के अलग-अलग स्तरों पर होता था, जिसमें} पीपीपी दलाल, दस्तावेज तैयार करने वाले और सिस्टम से जुड़े लोग शामिल थे। कुछ लेन-देन डिजिटल माध्यम से तो कुछ नकद में किए जाते थे, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।
गिरफ्तार आरोपी: नाम और संरचित सूची
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में प्रमुख नाम:
- डॉ. राजेश शर्मा – पूर्व रजिस्ट्रार, राजस्थान मेडिकल काउंसिल
इसके अलावा गिरफ्तार अन्य 17 आरोपी निम्न श्रेणियों में शामिल हैं:
(1) फर्जी सर्टिफिकेट लेने वाले अभ्यर्थी (लगभग 10–12)
- विदेश से MBBS लेकिन FMGE फेल
- नकली दस्तावेज के आधार पर रजिस्ट्रेशन प्राप्त
(2) दलाल/मिडिलमैन (3–4 व्यक्ति)
- अभ्यर्थियों और नेटवर्क के बीच कनेक्शन
- पैसों का लेन-देन और सेटिंग
(3) नेटवर्क संचालक/तकनीकी सहयोगी (2–3 व्यक्ति)
- फर्जी सर्टिफिकेट और दस्तावेज तैयार करना
- डेटा मैनेजमेंट और सिस्टम में एंट्री करवाना
इनको किया गिरफ्तार
- राजेश शर्मा (आरएमसी के तत्कालीन रजिस्ट्रार) निवासी श्रीराम विहार कॉलोनी, वैशाली नगर, अजमेर
- अखिलेश माथुर (एमआरसी के तत्कालीन नोडल ऑफिसर) निवासी नागरिक नगर, टोंक रोड, जयपुर
- विनय चौहान निवासी अशोक विहार कॉलोनी, धौलपुर
- यश पुरोहित (पैसिफिक मेडिकल कॉलेज उदयपुर में माईकोबायलॉजी में ट्यूटर) निवासी देवली छोटा, सांगवाड़ा, डूंगरपुर
- प्रतीक चौधरी निवासी वार्ड नं. 02, रीझाणी मलसीसर, झुंझुनूं
- नरेन्द्र सिंह पुत्र निवासी खतेपुरा, झुंझुनूं
- दयाराम गुर्जर निवासी वार्ड 03, राजोता, खेतड़ी, झुंझुनूं
- मनीष चंदेला निवासी शिव कॉलोनी, अलवर
- श्रवण लामरोर निवासी कुम्हार रोड, नाडसर, जोधपुर
- रवि कुमार गुर्जर निवासी गुढाचन्द्रजी, नादौती, करौली
- करण सिंह गुर्जर निवासी छावनी नीमका, वार्ड नं. 16, सीकर
- अविनाश सैनी निवासी वार्ड नं. 4, बड़ी बाड़ी सकट, अलवर
- विक्की सामोता निवासी कोटड़ा नीमकाथाना, सीकर
- दिनेश कुमार निवासी मिर्जवास, लक्ष्मणगढ़, सीकर
- ईश्वर यादव निवासी मकान नं. ब्राह्मण मोहल्ला, सलारपुर, बहरोड़
- विकास यादव निवासी गोरर्धनपुरा, कोटपूतली
- दीपेश यादव निवासी माजरी खुर्द, कोटपूतली, बहरोड़
- संकेत टेलर निवासी पुराना बस स्टैंड, परतापुर बांसवाड़ा
बाकी आरोपियों के नाम पुलिस द्वारा विस्तृत सूची के रूप में अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर और नाम सामने आने की संभावना है।
जांच का विस्तार: 90 से अधिक डॉक्टर संदेह के घेरे में
SOG की प्रारंभिक जांच में 90 से अधिक ऐसे डॉक्टरों की पहचान हुई है, जिनकी डिग्री और पंजीकरण संदिग्ध पाए गए हैं। इस मामले में राज्य के कई जिलों में एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें बड़ी मात्रा में दस्तावेज, कंप्यूटर, मोबाइल और डिजिटल डेटा जब्त किया गया है। जांच एजेंसियां अब इन सभी की गहन जांच कर रही हैं।
सिस्टम की विफलता: कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला
यह मामला केवल अपराधियों की साजिश नहीं बल्कि सिस्टम की गंभीर खामियों को भी उजागर करता है। मेडिकल काउंसिल स्तर पर दस्तावेजों की सही तरीके से जांच नहीं होना, डिजिटल वेरिफिकेशन की कमी और आंतरिक निगरानी का कमजोर होना इस रैकेट को बढ़ावा देने में प्रमुख कारण रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संगठित लापरवाही का भी मामला हो सकता है।
जनता के लिए खतरा: इलाज के नाम पर धोखा
इस रैकेट का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि अयोग्य लोग मरीजों का इलाज कर रहे थे। इससे गलत दवाइयां, गलत निदान और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते थे। खासतौर पर ग्रामीण और छोटे शहरों में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है, जहां लोग डॉक्टर की योग्यता की जांच नहीं कर पाते।
कानूनी कार्रवाई: सख्त धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है। SOG अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित अपराध है और इसकी जड़ तक पहुंचने के लिए विस्तृत जांच जारी है।
आगे की कार्रवाई: और बड़े खुलासे संभव
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है और इसके तार अन्य राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं। आने वाले समय में और गिरफ्तारियां, नए नामों का खुलासा और कुछ संस्थानों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
🎯 भरोसे पर सबसे बड़ा हमला
राजस्थान में सामने आया यह फर्जी डॉक्टर रैकेट केवल एक आर्थिक अपराध नहीं बल्कि आम जनता के विश्वास और जीवन पर सीधा हमला है। यह घटना बताती है कि यदि सिस्टम में पारदर्शिता और निगरानी मजबूत न हो, तो ऐसे संगठित अपराध आसानी से पनप सकते हैं।
