Written by : Sanjay kumar
भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक नेतृत्व पर केंद्रित रहा राष्ट्रीय सम्मेलन
कोटा, 9 मई। राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कोटा में “द जामवंत कॉन्क्लेव 2026” का भव्य आयोजन राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी दिव्याथर्व एवं विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। “प्राचीन ज्ञान • आधुनिक भारत • वैश्विक व्यवस्था” विषय पर आधारित इस राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में भारत की सनातन ज्ञान परंपरा, आधुनिक राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक नेतृत्व और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारतीय दृष्टिकोण की भूमिका पर गहन चर्चा की गई।
“रामराज्य से पुनर्जागृत भारत” विषय पर हुआ गहन विमर्श
“मानस, राष्ट्र और विश्व व्यवस्था” की अवधारणा से प्रेरित इस सम्मेलन का मुख्य विषय “सनातन रणनीति — रामराज्य से पुनर्जागृत भारत तक” रहा। कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, विचारकों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन में भारत की सांस्कृतिक चेतना, नेतृत्व दर्शन, नैतिक मूल्यों तथा आधुनिक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर सार्थक चर्चा हुई।
कुलगुरुओं और विशिष्ट अतिथियों ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोफेसर बी. पी. सारस्वत, कुलगुरु, कोटा विश्वविद्यालय; विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर पी. के. शर्मा, कुलगुरु, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर तथा राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
राजनयिक डॉ. दीपक वोहरा ने विकसित भारत 2047 पर रखा दृष्टिकोण
कॉन्क्लेव के मुख्य वक्ता प्रख्यात राजनयिक एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ राजदूत डॉ. दीपक वोहरा रहे। उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका, रणनीतिक स्वायत्तता और सांस्कृतिक मूल्यों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत आज आर्थिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और सामरिक सभी क्षेत्रों में विश्व मंच पर एक सशक्त नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल क्रांति, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भागीदारी को विकसित भारत 2047 की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। उन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं से राष्ट्रभक्ति, ईमानदारी और कर्मनिष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि देश का भविष्य जागरूक और अनुशासित युवा शक्ति से निर्मित होगा।
प्रो. पी. के. शर्मा ने बताया रामराज्य का आधुनिक स्वरूप
अपने संबोधन में प्रोफेसर पी. के. शर्मा ने रामराज्य को भारतीय सभ्यता की सर्वोत्तम शासन व्यवस्था का आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि न्याय, समानता, नैतिकता, उत्तरदायित्व और जनकल्याण पर आधारित सशक्त प्रशासनिक व्यवस्था है।
उन्होंने “चार टी” — तकनीक, पारदर्शिता, विश्वास और परंपरा — को आधुनिक भारत में रामराज्य की पुनर्स्थापना का आधार बताया। उनके अनुसार तकनीक विकास को गति देती है, पारदर्शिता व्यवस्था को मजबूत बनाती है, विश्वास समाज और नेतृत्व को जोड़ता है तथा परंपरा राष्ट्र की सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखती है।
डॉ. पी. के. सिंह ने जामवंत और हनुमान के नेतृत्व गुणों पर डाला प्रकाश
अपने वक्तव्य में डॉ. पी. के. सिंह ने रामचरितमानस के विभिन्न पात्रों के जीवन मूल्यों और नेतृत्व क्षमता पर प्रकाश डालते हुए जामवंत और हनुमान के चरित्र को आधुनिक समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी बताया।
उन्होंने कहा कि जामवंत प्रेरणा, मार्गदर्शन और सकारात्मक नेतृत्व के प्रतीक हैं। जिस प्रकार उन्होंने हनुमान जी को उनकी शक्ति का स्मरण कराया, वह नेतृत्व और प्रेरणा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो लोगों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सके।
युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया
राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी ने कॉन्क्लेव को भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक नेतृत्व और युवा चेतना को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से भी जोड़ते हैं।
उन्होंने युवाओं से नवाचार, अनुसंधान और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में युवा शक्ति की सबसे बड़ी भूमिका होगी।
आयोजन समिति ने जताया आभार
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजन समिति की प्रमुख अनीता चौहान ने सभी विशिष्ट अतिथियों और वक्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए सभी शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, राष्ट्र निर्माण और युवा जागरण के विचारों को समाज तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बना।
