Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 26 मार्च।
भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने झालावाड़ जिले की डग तहसील में गेहूं खरीद पंजीकरण में सामने आई भारी अनियमितताओं पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है। प्रान्त प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा कि एक ओर जहां साधारण किसान अपनी उपज की तुलाई के लिए एक-एक स्लॉट को तरस रहा है, वहीं दूसरी ओर रसूखदारों और बिचौलियों द्वारा अधिकारियों की मिलीभगत से 5000 से 9000 क्विंटल तक के फर्जी स्लॉट बुक कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि 9000 क्विंटल की उपज के लिए 1100 बीघा से अधिक भूमि की आवश्यकता होती है, जो किसी भी स्थानीय किसान के पास उपलब्ध नहीं है। यह स्पष्ट रूप से सरकारी धन और न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था का दुरुपयोग करने का प्रयास है।
जिला अध्यक्ष जगदीश कलमंडा और सम्भाग अध्यक्ष गिरीराज चौधरी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक तहसील या जिले का मामला नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में व्यापारियों द्वारा किसानों के गिरदावरी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर कम दाम पर खरीदे गए गेहूं को सरकारी कोटे में खपाने की एक बड़ी साजिश प्रतीत होती है। पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे सभी संदिग्ध स्लॉट को तुरंत निरस्त कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और ऑनलाइन पोर्टल की खामियों को दूर किया जाए।
संगठन की प्रदेश महिला प्रमुख रमा शर्मा और प्रान्त महिला प्रमुख रजनी धाकड़ ने कहा कि भ्रष्टाचार के इस खेल का सीधा असर प्रदेश के सीमांत और छोटे किसानों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर भुगतान और स्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं। जिला मंत्री रूनारायण यादव ने मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से गुहार लगाते हुए मांग की है कि इस घोटाले की जड़ें गहरी हो सकती हैं, अतः इसकी जांच केवल झालावाड़ तक सीमित न रखकर संपूर्ण प्रदेश में विशेष जांच दल गठित कर करवाई जाए। भारतीय किसान संघ का स्पष्ट मत है कि जब तक प्रदेश के हर जिले में पंजीकरण डेटा का भौतिक सत्यापन नहीं होगा, तब तक वास्तविक किसानों को सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ मिलना संभव नहीं है।
