Written by : Sanjay kumar
New Delhi, 19 April 2026
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: सुरक्षा को मौलिक अधिकार माना
बढ़ते सड़क हादसों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सुरक्षित सड़क यात्रा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। अदालत ने केंद्र और राज्यों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि अब हाईवे पर लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में जानें जाती हैं, इसलिए जिम्मेदारी तय करना और नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है। अदालत ने संबंधित एजेंसियों को समयबद्ध कार्रवाई और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है ताकि हादसों में कमी लाई जा सके।
हाईवे पर खड़ी गाड़ी पर पूर्ण प्रतिबंध
कोर्ट ने हाईवे पर अवैध रूप से खड़े वाहनों को हादसों की बड़ी वजह मानते हुए इस पर सख्त रोक लगा दी है। अब कोई भी ट्रक, बस या अन्य वाहन सड़क या उसके किनारे बिना अनुमति खड़ा पाया गया तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, हाईवे किनारे बने अवैध ढाबों, दुकानों और अतिक्रमण को 60 दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत का मानना है कि सड़क के किनारे इस तरह की गतिविधियां न केवल ट्रैफिक को बाधित करती हैं, बल्कि गंभीर दुर्घटनाओं को भी जन्म देती हैं।
हर 75 किमी पर एम्बुलेंस और क्रेन की अनिवार्यता
दुर्घटना के बाद समय पर मदद पहुंचाने के लिए कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए हर 75 किलोमीटर पर एम्बुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का निर्देश दिया है। इससे हादसे के बाद घायल व्यक्तियों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने और सड़क से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने में तेजी आएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि “गोल्डन ऑवर” के दौरान त्वरित चिकित्सा सहायता मिलने से हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं, इसलिए इस व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए।
ब्लैक स्पॉट सुधार और तकनीकी निगरानी पर जोर
अदालत ने दुर्घटना-प्रवण “ब्लैक स्पॉट” की पहचान 45 दिनों के भीतर करने और वहां सुधार कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे, स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम, साइनबोर्ड और इमरजेंसी कॉल सुविधाएं लगाने पर भी जोर दिया गया है। कोर्ट का मानना है कि तकनीक के उपयोग से न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी नियंत्रण भी रखा जा सकता है।
राज्यों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे “हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स” का गठन करें, जो नियमित पेट्रोलिंग और निगरानी सुनिश्चित करे। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों को तय समय में अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। अदालत ने साफ चेतावनी दी है कि निर्देशों की अनदेखी करने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि सड़क सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए।
