Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 8 जून 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कुन्हाड़ी, लैंडमार्क सिटी स्थित कमला उद्यान सेवाकेंद्र पर आयोजित पांच दिवसीय ‘लक्की स्टार समर कैंप’ का समापन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभाओं और उत्साह का महासंगम साबित हुआ। पांच दिनों तक चले इस विशेष शिविर का समापन समारोह बेहद हर्षोल्लास और सकारात्मक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। इस विदाई बेला में बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। कैंप के दौरान आयोजित विभिन्न विधाओं और रचनात्मक प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले नन्हे सितारों को मुख्य अतिथियों द्वारा आकर्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।


प्रतिभाओं को मिला मार्गदर्शकों का संबल और प्रोत्साहन
इस भव्य समापन समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रबुद्ध मनीषियों ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर बच्चों का मनोबल बढ़ाया। अतिथियों में कोटा विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग की डायरेक्टर प्रोफेसर अनुकृति शर्मा, जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) के कोटा अध्यक्ष व पत्रकार संजय चौबीसा तथा मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. तापस कनु व्यास गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के शुभारंभ में कोटा संभाग प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने सभी आगंतुक अतिथियों का भारतीय परंपरा के अनुसार पुष्पगुच्छ भेंट कर और सम्मान पटका पहनाकर भावभीना अभिनंदन किया।


माता-पिता ही हैं बच्चों के पहले शिल्पकार: बीके उर्मिला दीदी
समारोह को संबोधित करते हुए कोटा संभाग प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने एक बेहद प्रेरक और विचारणीय उद्बोधन दिया। उन्होंने वहां मौजूद अभिभावकों को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि माता-पिता ही बच्चों के जीवन के पहले शिल्पकार होते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनके भीतर श्रेष्ठ संस्कारों के निर्माण में परिवार की भूमिका सबसे अहम है। दीदी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि हम अपने घरों में पवित्र, शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करेंगे, तो बच्चे स्वतः ही उत्कृष्ट मानवीय मूल्यों को आत्मसात कर लेंगे। ऐसी संस्कारी संतानें न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे समाज और देश का नाम वैश्विक पटल पर रोशन करेंगी।
राजयोग मेडिटेशन से बदलेगा जीवन का नजरिया
अपने प्रेरणादायी वक्तव्य को आगे बढ़ाते हुए उर्मिला दीदी ने आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में ‘राजयोग मेडिटेशन’ (राजयोग ध्यान) की प्रासंगिकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सभी बच्चों और अभिभावकों को दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने का आह्वान किया। दीदी ने स्पष्ट किया कि राजयोग के माध्यम से न केवल मानसिक एकाग्रता और आंतरिक शक्ति बढ़ती है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। यह ध्यान विधि बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के शिखर पर ले जाने में सक्षम है।
नन्हे कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा सबका मन
इस पांच दिवसीय समर कैंप की सबसे खूबसूरत झलक समापन के अवसर पर तब देखने को मिली, जब शिविर में सीखे गए हुनर का बच्चों ने मंच पर प्रदर्शन किया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई मनमोहक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और रचनात्मक प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी अतिथियों और अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों के अभिनय, नृत्य और कलात्मक कौशल को देखकर पूरा सदन उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति आश्वस्त नजर आया। सभी अतिथियों ने खुले दिल से बच्चों की इस अद्भुत रचनात्मकता और उनके आत्मविश्वास की सराहना की।
संकल्प की शक्ति के साथ उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम
समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों ने अलग-अलग विषय पर बच्चों को मोटिवेशनल टिप्स दिए। समारोह का समापन एक बेहद उत्साह और संकल्पित माहौल में हुआ। मंच से सभी बच्चों को यह संकल्प दिलाया गया कि वे हर वर्ष आयोजित होने वाले इस व्यक्तित्व विकास समर कैंप में अनिवार्य रूप से भाग लेंगे और अपने जीवन को निरंतर श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों, अभिभावकों और अतिथियों को पवित्र ईश्वरीय प्रसाद का वितरण किया गया। यह समर कैंप बच्चों के दिलों में यादों का एक ऐसा खूबसूरत गुलदस्ता और संस्कारों की ऐसी अनमोल धरोहर छोड़ गया, जो जीवनभर उनका मार्गदर्शन करती रहेगी।
