Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 20 जुलाई : राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के आयोजन को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को कड़े निर्देश जारी किए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि अब चुनाव प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समयसीमा का उल्लंघन होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निश्चित की जाएगी।
न्यायालय की समयसीमा और सरकार की प्रतिबद्धता
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि चुनाव कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार:
- ओबीसी (राजनीतिक) आयोग की रिपोर्ट: सरकार ने आश्वस्त किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग का सर्वे कार्य 5 अगस्त 2026 तक पूर्ण कर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
- आरक्षण लॉटरी: आयोग द्वारा वार्डों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया को 15 अगस्त 2026 से पूर्व ही संपन्न कर लिया जाएगा।
- निर्वाचन कार्यक्रम: राज्य निर्वाचन आयोग 15 अगस्त 2026 को चुनाव की औपचारिक घोषणा कर देगा। इसके बाद, प्रथम चरण में निकाय चुनाव और तदोपरांत पंचायत चुनाव कराए जाएंगे।
- निर्धारित लक्ष्य: समस्त निर्वाचन प्रक्रिया को 15 नवंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
अदालत की नाराजगी और कड़े निर्देश
हाईकोर्ट ने बार-बार चुनाव की तारीखें आगे बढ़ाने पर सरकार के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। याचिककर्ताओं (पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य) की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पूर्व में भी अदालती आदेशों की अनदेखी की गई है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि निकायों का समय पर गठन होना अनिवार्य है।
अदालत ने राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह के इस तर्क को कि ’15 अगस्त को सरकारी अवकाश है’, खारिज करते हुए कहा कि राज्यहित में प्रशासनिक व्यस्तता को आधार बनाकर चुनावों में देरी करना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दशहरा और दीपावली जैसे त्यौहारों को ध्यान में रखते हुए 15 नवंबर की अंतिम डेडलाइन दी जा रही है।
जवाबदेही तय करने की चेतावनी
हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद को निर्देशित किया कि चुनाव प्रक्रिया में अब कोई बदलाव या विस्तार नहीं होगा। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव संपन्न नहीं होते हैं, तो यह सीधे तौर पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानी जाएगी और इसमें शामिल अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करते हुए उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगामी रणनीति
राज्य सरकार ने अब एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है जिसके अंतर्गत 20 सितंबर 2026 को पंचायत चुनावों का विशिष्ट कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि त्योहारों के बीच में चुनाव प्रक्रिया को बाधित न होने दिया जाए और सुचारू रूप से मतदान संपन्न कराया जाए।
राज्य के आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि लंबे समय से स्थानीय निकायों में चुने हुए प्रतिनिधियों के अभाव में विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। अब 15 अगस्त को होने वाली घोषणा से चुनावी सरगर्मियां तेज होने की पूरी संभावना है।
