Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 20 जुलाई। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध भारतीय डाक कर्मचारी संघ, राजस्थान परिमंडल के आह्वान पर कोटा जिले के सभी डाकघरों में सोमवार को डाक कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में कार्य करते हुए विरोध दर्ज कराया और विभाग व केंद्र सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की।
एक सप्ताह तक चलेगा चरणबद्ध आंदोलन
भारतीय मजदूर संघ के जिला महामंत्री रवि गौतम ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 20 से 27 जुलाई 2026 तक डाक कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपनी सेवाएं देते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य कर्मचारियों की समस्याओं की ओर सरकार और विभाग का ध्यान आकर्षित करना है।
कार्यभार बढ़ा, कर्मचारियों की कमी बनी बड़ी समस्या
ग्रामीण डाक सेवक संघ के मंडल सचिव धनंजय सिंह चौहान ने कहा कि डाक विभाग में लगातार बढ़ते कार्यभार, कर्मचारियों की भारी कमी, रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होने, अव्यावहारिक लक्ष्यों और सेवा शर्तों की अनदेखी के कारण कर्मचारियों में व्यापक असंतोष है। उनका कहना है कि इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं होने से डाक सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
निजीकरण की आशंका पर जताई चिंता
संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि डाक विभाग विदेशी परामर्शदाता कंपनी मैकेंज़ी की सलाह पर निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो आम और गरीब नागरिकों को मिलने वाली सुलभ डाक सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा डाक विभाग की जनसेवा की मूल भावना कमजोर होगी।
अधिकारों की रक्षा और डाक सेवाओं को मजबूत बनाने की मांग
संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ डाक सेवाओं को अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है। पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार और डाक विभाग से लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की अपील की।
आंदोलन के अगले चरण की चेतावनी
विभिन्न डाकघरों पर हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व परिमंडल अध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल, मंडल सचिव मुरलीधर सैन, परिमंडल पोस्टमैन यूनियन के मंडल सचिव सोनू बैरवा तथा ग्रामीण डाक सेवक संघ के मंडल सचिव धनंजय सिंह चौहान ने किया। संघ ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो घोषित कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन को अगले चरण में ले जाते हुए प्रदर्शन, हड़ताल और अन्य आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
