Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 31 जुलाई, 2026। राजस्थान सरकार के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (जलदाय विभाग) ने राज्य में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को टिकाऊ और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। विभाग द्वारा प्रदेश के प्रमुख जल पंपिंग स्टेशनों को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए 201 मेगावाट (MW) क्षमता की विशाल सौर ऊर्जा परियोजना शुरू की जा रही है।
पीपीपी (रेस्को) मॉडल पर आधारित यह परियोजना किसी भी राज्य स्तरीय सरकारी विभाग द्वारा क्रियान्वित की जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा पहलों में से एक है।
परियोजना के मुख्य आकर्षण एवं रणनीतिक बिंदु:
- भारी वित्तीय बचत: वर्तमान में जलदाय विभाग के विभिन्न पंपिंग स्टेशनों पर वार्षिक लगभग 350 करोड़ यूनिट बिजली की खपत होती है। 201 मेगावाट के इस सोलर प्रोजेक्ट के पूर्ण कार्यान्वयन से विभाग के बिजली बिलों में प्रतिमाह लगभग ₹184 करोड़ की बड़ी बचत का अनुमान है।
- शून्य पूंजीगत व्यय (Zero Capital Expenditure): यह पूरी परियोजना ₹703.5 करोड़ की अनुमानित लागत से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP – RESCO) मॉडल के तहत विकसित की जा रही है। इसमें राज्य सरकार या विभाग को कोई शुरुआती पूंजीगत निवेश नहीं करना होगा। निजी निवेशक/कंपनी प्लांट स्थापित करने, उसका संचालन करने और 25 वर्षों तक रख-रखाव के लिए उत्तरदायी होगी। विभाग केवल उपयोग की गई सौर ऊर्जा का निर्धारित दरों पर भुगतान करेगा।
- वर्चुअल नेट मीटरिंग व्यवस्था: परियोजना में वर्चुअल नेट मीटरिंग (Virtual Net Metering) प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इसके तहत 1-1 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट्स स्थापित कर उन्हें निकटतम सब-स्टेशनों से जोड़ा जाएगा। एक स्थान पर उत्पादित सौर ऊर्जा का वित्तीय लाभ विभाग के विभिन्न दूरस्थ जल पंपिंग कनेक्शनों को प्राप्त हो सकेगा।
- प्रथम चरण में 8 जिले शामिल: प्रथम चरण में प्रदेश के 8 प्रमुख जिलों—कोटा, बूंदी, दौसा, बारां, भरतपुर, डूंगरपुर, सवाई माधोपुर एवं टोंक के कुल 201 बड़े पंपिंग स्टेशनों पर सोलर सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। प्रथम चरण की सफलता के पश्चात् इस मॉडल को चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
प्रथम चरण में स्वीकृत सोलर प्लांट्स का ज़िलावार विवरण:
- बारां: 43 प्लांट्स
- भरतपुर: 31 प्लांट्स
- बूंदी: 13 प्लांट्स
- दौसा: 26 प्लांट्स
- डूंगरपुर: 16 प्लांट्स
- कोटा: 21 प्लांट्स
- सवाई माधोपुर: 27 प्लांट्स
- टोंक: 24 प्लांट्स
गुणवत्ता और निष्पक्षता हेतु कड़े मानक:
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और जोखिम प्रबंधन के लिए एक ही कंपनी को पूरी 201 मेगावाट की क्षमता आवंटित नहीं की जाएगी; एक डेवलपर को अधिकतम 50 मेगावाट तक की क्षमता का कार्य ही दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अनुबंध में न्यूनतम 17% से 19% का क्षमता उपयोग कारक (CUF – Capacity Utilization Factor) अनिवार्य किया गया है ताकि निरंतर और गुणवत्तापूर्ण बिजली उत्पादन सुनिश्चित हो सके।
अनुबंध हस्ताक्षर होने के 9 माह की निर्धारित समयावधि के भीतर सभी सोलर प्लांट्स को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल न केवल राज्य कोष पर वित्तीय भार कम करेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर राजस्थान के हरित ऊर्जा (Green Energy) लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
