इस्कॉन नंदग्राम धाम, कोटा की श्री श्री गौर निताई रथ यात्रा: भक्ति, संस्कृति और श्रद्धा का ऐतिहासिक संगम

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 17 जनवरी (शनिवार):

इस्कॉन नंदग्राम धाम, कोटा के तत्वावधान में आयोजित श्री श्री गौर निताई रथ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति के दिव्य उत्सव के रूप में अत्यंत भव्य एवं ऐतिहासिक रही। इस पावन अवसर पर भगवान श्री श्री गौर निताई ने नगरवासियों को अलौकिक एवं मनोहारी दर्शन प्रदान किए।

रथ पर विराजमान श्री श्री गौर निताई की छवि अत्यंत आकर्षक एवं दिव्य प्रतीत हो रही थी। लगभग 30 फीट ऊंचा यह भव्य रथ जयपुर स्थित गुप्त वृंदावन धाम से लाया गया था, जो आधुनिक हाइड्रोलिक तकनीक पर आधारित था। रथ का अलंकरण प्राकृतिक एवं सुगंधित पुष्पों से किया गया था, जिन्हें विशेष रूप से दिल्ली एवं बैंगलोर से मंगवाया गया था, जिससे रथ की शोभा और अधिक बढ़ गई।

रथ यात्रा का शुभारंभ गीता भवन से भगवान की विधिवत आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात सैकड़ों भक्तों ने हर्षोल्लास के साथ रथ को खींचते हुए अपनी भक्ति प्रकट की। रथ यात्रा गीता भवन से प्रारंभ होकर सेवन वंडर कोटड़ी रोड, गुमानपुरा, लाला लाजपत राय चौराहा एवं घोड़े वाले बाबा चौराहा से होती हुई वल्लभ नगर स्थित पटेल पार्क पहुंची, जहां इसका भव्य समापन हुआ।

यात्रा के दौरान भक्तों द्वारा भगवान श्री श्री गौर निताई को विविध प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया तथा मार्ग में श्रद्धालुओं को प्रसादम का वितरण किया गया। इस पावन अवसर पर गुप्त वृंदावन धाम, जयपुर एवं हरे कृष्ण मूवमेंट, उदयपुर से पधारे भक्तों द्वारा अत्यंत भावपूर्ण एवं उत्साहवर्धक संकीर्तन किया गया, जिसमें सभी भक्तों ने कीर्तन एवं नृत्य के माध्यम से आनंदपूर्वक सहभागिता की।

वल्लभ नगर में यात्रा के समापन पर कॉलोनीवासियों द्वारा भगवान का भव्य स्वागत किया गया। समस्त क्षेत्र को दीपकों से सजाया गया तथा भगवान पर पुष्पवर्षा कर श्रद्धा अर्पित की गई। पटेल पार्क में भगवान श्री श्री गौर निताई की भव्य महाआरती संपन्न हुई। इस अवसर पर मंदिर उपाध्यक्ष राधप्रिय दास प्रभु ने रथ यात्रा के आयोजन के उद्देश्य एवं सनातन संस्कृति के महत्वपूर्ण मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों ने एक साथ महाप्रसादम ग्रहण किया। यह रथ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि कोटा नगर में सांस्कृतिक एकता, आध्यात्मिक चेतना और भक्ति भाव के प्रसार का एक अनुपम उदाहरण भी प्रस्तुत कर गई।

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