रामायण के प्रसंगों से प्रशिक्षार्थियों ने दिया जीवन मूल्यों का संदेश

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 24 फरवरी। जवाहरलाल नेहरू टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, लखावा (कोटा) में 23 एवं 24 फरवरी को आयोजित द्विदिवसीय विशेष कार्यक्रम ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में रामायण: पाठ, परिचय एवं नाट्य रूपांतरण’ का मंगलवार को समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य भावी शिक्षकों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं आदर्शों से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम प्रभारी डॉ. नमिता पारीक ने बताया कि बी.एड. प्रथम वर्ष के प्रशिक्षार्थियों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन कर उसके नैतिक आदर्शों और जीवन मूल्यों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। अभिनय के माध्यम से प्रशिक्षार्थियों ने यह संदेश दिया कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन और मानवीय मूल्यों का मार्गदर्शक है।

समापन अवसर पर मुख्य वक्ता एवं शिक्षा संकाय, कोटा विश्वविद्यालय की डीन प्रो. सुषमा सिंह ने कहा कि रामायण भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसकी शिक्षाएं आज भी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रासंगिक हैं। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन शिक्षा को संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।

कार्यक्रम प्रभारी डॉ. दीपिका जोशी ने जानकारी दी कि मंचित प्रस्तुतियों में सीता स्वयंवर, राम वन गमन, केवट प्रसंग, भरत मिलाप, सीता हरण, अशोक वाटिका, राम-रावण युद्ध तथा राम दरबार जैसे प्रसंगों का प्रभावी मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

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