कोटा, 25 फरवरी 2026
भारतीय मजदूर संघ, जिला कोटा द्वारा श्रमिकों की लंबित मांगों एवं बजट वर्ष 2026-27 में उनकी उपेक्षा के विरोध में जिला मुख्यालय कोटा पर प्रभावशाली धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व श्री ब्रिजेशकांत शर्मा, प्रदेश प्रभारी (कार्यकर्ता विकास प्रकोष्ठ), राजस्थान ने किया। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तथा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रेषित किया गया।
भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया कि केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तुत बजट वर्ष 2026-27 में श्रमिक वर्ग की मूलभूत समस्याओं और मांगों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई है। संघ के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों, संविदा कर्मियों, ठेका श्रमिकों तथा असंगठित क्षेत्र के कामगारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर ठोस प्रावधानों का अभाव निराशाजनक है।
संघ ने अपने ज्ञापन में श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, नवीन श्रम संहिताओं में श्रमिक हितैषी संशोधन, न्यूनतम मजदूरी को केंद्र सरकार के समकक्ष सुनिश्चित करने, ईपीएफ एवं ईएसआईसी की वेतन सीमा में वृद्धि, ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने, बोनस एवं ग्रेच्युटी की सीमा में संशोधन तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कल्याणकारी बोर्डों के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई। संघ का मत है कि जब तक इन मांगों पर सकारात्मक एवं समयबद्ध निर्णय नहीं लिए जाते, तब तक श्रमिक वर्ग में असंतोष बना रहेगा।
धरना-प्रदर्शन में विद्युत उत्पादन, प्रसारण एवं वितरण इकाइयों, जलदाय विभाग, रोडवेज, ग्रामीण बैंक, रेलवे, नमकीन उद्योग तथा स्टोन शिपर्स से जुड़े श्रमिक प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उपस्थित श्रमिकों ने एक स्वर में कहा कि श्रमिकों की उपेक्षा राष्ट्र के विकास को प्रभावित करती है और सरकारों को श्रमशक्ति के योगदान का सम्मान करते हुए ठोस नीतिगत निर्णय लेने चाहिए।
भारतीय मजदूर संघ, जिला कोटा ने पुनः स्पष्ट किया कि श्रमिक हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। संघ ने सरकारों से शीघ्र सकारात्मक पहल करने की मांग करते हुए सभी श्रमिक साथियों से एकजुटता बनाए रखने और संगठनात्मक प्रयासों को मजबूत करने का आह्वान किया है।
