अनिल अंबानी पर ED की बड़ी कार्रवाई – मुंबई का आवास ‘अबोड’ (किमत 3,716 करोड़) किया कुर्क

Written by : Sanjay kumar

नई दिल्ली, 25 फरवरी 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक फ्रॉड जांच के तहत एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। एजेंसी ने मुंबई के पाली हिल स्थित उनके भव्य आवास ‘अबोड’ को अस्थाई रूप से कुर्क (Attached) कर लिया है, जिसकी अनुमानित मूल्य 3,716.83 करोड़ रुपये है। इस कार्रवाई के तहत अब तक कुल मिलाकर लगभग ₹15,700 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।


🏠 अबोड – एक प्रीमियम प्रॉपर्टी

  • मुंबई के पाली हिल (Bandra West) के सबसे प्रतिष्ठित इलाकों में स्थित यह 17-मंजिला आवास अपनी आलीशान डिजाइन और प्रीमियम लोकेशन के लिए जाना जाता है।
  • यह घर लगभग 66 मीटर ऊंचा है और भारत के सबसे महंगे निजी आवासों में से एक माना जाता है।

📌 मामला: बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जांच

  • ED ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की है। यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) द्वारा कथित बैंक धोखाधड़ी, कर्ज के दुरुपयोग तथा धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़ा है।
  • एजेंसी का आरोप है कि RCOM और संबद्ध कंपनियों ने बैंकों से बड़े ऋण प्राप्त किए, जिनका सही उपयोग नहीं हुआ तथा कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्तता के सबूत मिले हैं।
  • इस मामले में अब तक ED ने कई प्रोपर्टीज़, बैंक बैलेंस और निवेश समेत संपत्तियों को अटैच किया है — कुल प्रवर्तित मूल्य लगभग ₹15,700 करोड़ तक पहुंच चुका है।

📍 अनिल अंबानी से पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया

  • अनिल अंबानी को ED के सामने दूसरे दौर की पूछताछ के लिए बुलाया गया है, जहाँ उनसे बैंक धोखाधड़ी, रियल एस्टेट निवेश और धन स्रोतों के बारे में विस्तार से सवाल पूछे जाएंगे।
  • इससे पहले वे अगस्त 2025 में भी ED के सामने बयान दर्ज करा चुके हैं।

📊 इससे जुड़े अन्य कानूनी अपडेट

  • कुछ दिनों पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश निरस्त कर दिया था, जिसने कुछ बैंकों को ‘धोखाधड़ी’ टैग लगाने से रोक रखा था। अब यह रोक हटने के बाद बैंक फ्रॉड की ट्रेल पर और सख्ती से कार्रवाई संभव हो पाएगी।

📉 रिलायंस ग्रुप की वित्तीय चुनौतियाँ

  • RCOM और अन्य अंबानी समूह कंपनियों को पहले से ही लोन डिफॉल्ट तथा कर्ज के मुद्दों का सामना करना पड़ा है। कई ऋण खाते NPA (Non-Performing Asset) घोषित हुए थे, और बाद में कुछ को ‘धोखाधड़ी’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
  • इस लंबी जांच के दौरान ED और अन्य जांच एजेंसियों ने समूह के कई परिसरों, कार्यालयों और निवेशों की जांच भी की है।

आज की कार्रवाई भारतीय आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था में उच्च-स्तरीय जांच एजेंसियों की सख्ती को दर्शाती है, जहाँ बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ भी वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और कर्ज के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की बारीकी से जांच की जा रही है। इस फैसले के बाद अनिल अंबानी के लिए और भी कठिन प्रश्नों का सामना करना संभव है क्योंकि जांच अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!