दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के तहत मुकुंदरा हिल्स टनल तैयार — अत्याधुनिक 8-लेन सुरंग से दिल्ली–वडोदरा कॉरिडोर को मिलेगी नई गति

Written by : Sanjay kumar

कोटा, 14 अप्रैल। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) द्वारा विकसित दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना के कोटा सेक्शन में स्थित मुकुंदरा हिल्स टनल का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा NHAI अधिकारियों द्वारा यह जानकारी दी गई है कि टनल को आगामी माह (संभावित रूप से मई 2026) तक यातायात के लिए प्रारंभ किया जा सकता है। यह टनल देश के सबसे महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कॉरिडोर का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स, कनेक्टिविटी एवं आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगा।

यह टनल मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व क्षेत्र के नीचे निर्मित की गई है, जहाँ पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है। इस परियोजना में इको-सेंसिटिव जोन के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित किया गया है, जिससे प्राकृतिक आवास एवं वन्यजीवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

परियोजना का आधिकारिक विवरण (NHAI अभिलेखों के अनुसार)
मुकुंदरा टनल की कुल लंबाई लगभग 4.9 किलोमीटर है, जो ड्यूल-ट्यूब (दो समानांतर सुरंगों) के रूप में विकसित की गई है, प्रत्येक में 4-लेन यातायात की सुविधा है। इस प्रकार यह देश की पहली 8-लेन एक्सप्रेसवे टनल के रूप में स्थापित हो रही है। यह टनल दिल्ली – मुंबई एक्स्प्रेस वे के कोटा सेक्शन का महत्वपूर्ण भाग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 1350 किलोमीटर है और जिसे भारतमाला परियोजना के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे की डिजाइन स्पीड 120 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जिसे भविष्य में 12-लेन तक विस्तारित करने की क्षमता भी रखी गई है।

निर्माण अवधि एवं लागत संरचना
दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना का शुभारंभ वर्ष 2019 में किया गया था। मुकुंदरा टनल का निर्माण कार्य भौगोलिक जटिलताओं, कठोर चट्टानी संरचना, वन क्षेत्र की स्वीकृतियों तथा उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों के कारण चरणबद्ध तरीके से पूरा किया गया। इस टनल का निर्माण अनुमानित रूप से 3 से 4 वर्षों की अवधि में पूर्ण हुआ।
पूरे एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹1,00,000 करोड़ है, जबकि कोटा सेक्शन (जिसमें टनल भी शामिल है) पर हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। टनल निर्माण में आधुनिक ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग एवं न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया।

तकनीकी एवं सुरक्षा विशेषताएं
टनल को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। इसमें उन्नत वेंटिलेशन सिस्टम, रियल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, हाई-रिजोल्यूशन CCTV कैमरे, ऑटोमेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट SYSTEM, फायर डिटेक्शन एवं फायर फाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट मार्ग, पावर बैकअप तथा कंट्रोल रूम आधारित मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। टनल के भीतर प्रकाश व्यवस्था, साइनज एवं लेन मार्किंग को उच्च दृश्यता मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है।

पूर्व वैकल्पिक मार्ग एवं वर्तमान परिवर्तन
टनल निर्माण से पूर्व इस क्षेत्र में यातायात के लिए घुमावदार एवं संकरी घाटी सड़कों का उपयोग किया जाता था, जिसकी लंबाई लगभग 20 से 25 किलोमीटर थी। इस मार्ग में यात्रा समय अधिक लगता था तथा दुर्घटनाओं की संभावना भी बनी रहती थी।
टनल के चालू होने के पश्चात अब एक सीधा, नियंत्रित एवं उच्च गति वाला मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे उक्त दूरी कुछ ही मिनटों में तय की जा सकेगी तथा यातायात की सुरक्षा एवं दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

यात्रा समय एवं लॉजिस्टिक दक्षता पर प्रभाव
इस टनल के संचालन से गुरुग्राम से वडोदरा के बीच यात्रा समय में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है, जिससे यह दूरी लगभग 20–22 घंटे से घटकर 10–12 घंटे रह जाएगी। संपूर्ण एक्सप्रेसवे के पूर्ण संचालन के पश्चात दिल्ली से मुंबई के बीच यात्रा समय भी लगभग 24 घंटे से घटकर 12 घंटे के आसपास रह जाएगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर माल परिवहन की गति बढ़ेगी एवं लॉजिस्टिक्स लागत में महत्वपूर्ण कमी आएगी।

क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर लाभ
यह परियोजना राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात एवं हरियाणा राज्यों के औद्योगिक, कृषि एवं सेवा क्षेत्रों को सुदृढ़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। कोटा क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, पर्यटन (विशेषकर रणथंभौर एवं हाड़ौती क्षेत्र) तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। साथ ही, यह कॉरिडोर देश के पश्चिमी तट (मुंबई पोर्ट) को उत्तरी भारत से सीधे जोड़ते हुए निर्यात-आयात गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगा।

राज्य सरकार एवं समन्वय
परियोजना के क्रियान्वयन में राजस्थान सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक समन्वय एवं स्थानीय स्तर पर आवश्यक अनुमतियों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया गया। राज्य सरकार द्वारा इस परियोजना को क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

मुकुंदरा हिल्स टनल का संचालन भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। NHAI अधिकारियों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, इसके मई 2026 तक प्रारंभ होने की संभावना है, जिससे यह परियोजना परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, तेज एवं सुरक्षित बनाते हुए “नया भारत – सक्षम भारत” की परिकल्पना को साकार करेगी।

Pramukh Samvad

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