Written by : Sanjay kumar
सर्वर क्रैश, घंटों इंतजार और फिर अधूरी परीक्षा
नई दिल्ली, 30 मई 2026। देश की परीक्षा प्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG विवाद की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG 2026) में बड़े पैमाने पर तकनीकी गड़बड़ियां सामने आ गई हैं। शुक्रवार को देश के कई परीक्षा केंद्रों पर सर्वर और तकनीकी समस्याओं के कारण परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी, जिससे हजारों विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई केंद्रों पर छात्र घंटों तक परीक्षा शुरू होने का इंतजार करते रहे, जबकि कुछ स्थानों पर परीक्षा पूरी ही नहीं हो सकी। इसके बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को आधिकारिक बयान जारी कर छात्रों और अभिभावकों से माफी मांगनी पड़ी।
NTA ने माना तकनीकी फेलियर
NTA के अनुसार उसकी तकनीकी साझेदार कंपनी TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) के सिस्टम में आई तकनीकी खामी के कारण कई परीक्षा केंद्र प्रभावित हुए। एजेंसी ने स्वीकार किया कि इस वजह से छात्रों को मानसिक तनाव और असुविधा का सामना करना पड़ा।
NTA ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यार्थियों ने बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करवाई थी लेकिन तकनीकी कारणों से परीक्षा पूरी नहीं कर पाए या परीक्षा दे ही नहीं सके, उन्हें दोबारा परीक्षा का अवसर दिया जाएगा। नई परीक्षा तिथियों की घोषणा जल्द की जाएगी।
कई शहरों में अव्यवस्था, छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप
दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, वाराणसी सहित कई शहरों से छात्रों ने शिकायत की कि परीक्षा केंद्रों पर सर्वर डाउन होने के कारण कंप्यूटर आधारित परीक्षा बार-बार बाधित हुई। कुछ विद्यार्थियों का आरोप है कि उन्हें कई घंटे इंतजार कराने के बाद बिना परीक्षा दिए ही वापस भेज दिया गया।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा में बार-बार तकनीकी विफलताएं यह दर्शाती हैं कि परीक्षा प्रबंधन की तैयारियां पर्याप्त नहीं थीं।
बदला गया परीक्षा का समय
तकनीकी समस्या के बाद NTA को उसी दिन दोपहर की शिफ्ट का समय भी बदलना पड़ा। मूल रूप से दोपहर 3 बजे शुरू होने वाली परीक्षा को एक घंटे आगे बढ़ाकर शाम 4 बजे शुरू कराया गया ताकि प्रभावित केंद्रों पर व्यवस्थाएं सामान्य की जा सकें। साथ ही छात्रों को पूरा अतिरिक्त समय देने का आश्वासन भी दिया गया।
विपक्ष ने साधा निशाना
घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और NTA पर निशाना साधते हुए कहा कि NEET, CBSE, SSC और अब CUET जैसी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही समस्याएं परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।
लगातार बढ़ रहे सवाल
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की कई परीक्षाओं में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियां, सर्वर फेलियर, बायोमेट्रिक समस्याएं और परीक्षा स्थगन जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। इससे करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखना है तो केवल माफी और पुनर्परीक्षा पर्याप्त नहीं होगी। तकनीकी ढांचे की स्वतंत्र ऑडिटिंग, जवाबदेही तय करना और परीक्षा संचालन में उच्च स्तरीय निगरानी की आवश्यकता है।
छात्रों की सबसे बड़ी चिंता
सबसे अधिक चिंता उन विद्यार्थियों की है जो विश्वविद्यालयों में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं। बार-बार बदलती परीक्षा तिथियां, तकनीकी व्यवधान और अनिश्चितता उनके मानसिक स्वास्थ्य और करियर दोनों को प्रभावित कर रही है।
अब सभी की निगाहें NTA द्वारा घोषित होने वाली नई परीक्षा तिथियों और इस बात पर टिकी हैं कि एजेंसी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
प्रमुख बिंदु
- CUET-UG 2026 के कई परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ी से परीक्षा प्रभावित।
- NTA ने सार्वजनिक रूप से खेद जताया और माफी मांगी।
- TCS के सिस्टम में तकनीकी समस्या को कारण बताया गया।
- प्रभावित विद्यार्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा।
- कई केंद्रों पर छात्र घंटों तक इंतजार करते रहे।
- दोपहर की शिफ्ट का समय बदलकर शाम 4 बजे किया गया।
- NEET विवाद के बाद परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली फिर सवालों में।
- परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर राष्ट्रीय बहस तेज।
