हिंदी पत्रकारिता के 200 साल: मिशन से बाजार तक का सफर, विश्वसनीयता बचाने की चुनौती पर मंथन

Written by : प्रमुख संवाद

जयपुर, 30 मई। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) द्वारा शनिवार को जयपुर के रानी महल होटल में “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भविष्य एवं चुनौतियां” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर गंभीर मंथन किया।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने देश के लोकतंत्र, सामाजिक चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन वर्तमान समय में बाजारवाद, फेक न्यूज, सोशल मीडिया की अंधी प्रतिस्पर्धा और बढ़ते व्यावसायिक दबाव इसकी विश्वसनीयता के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं इतिहासकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पत्रकारिता का इतिहास संघर्ष, साहस और जनहित की प्रतिबद्धता से भरा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले संसाधनों की कमी के बावजूद पत्रकार सच को सामने लाने के लिए जोखिम उठाते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि “खबरें आज भी समाज में मौजूद हैं, जरूरत उन्हें खोजने और सामने लाने वाले पत्रकारों की है।” उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए पेशेवर पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता बताई।

विशेष वक्ता एवं जेएनयू मीडिया स्कूल के निदेशक डॉ. मौलिक शाह ने कहा कि पत्रकारिता को नियंत्रित करने या दबाने के प्रयास इतिहास में कभी सफल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और तथ्याधारित पत्रकारिता लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है तथा पीत पत्रकारिता आज इसकी विश्वसनीयता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।

वरिष्ठ पत्रकार लल्लूलाल शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में पत्रकारिता एक मिशन थी, लेकिन समय के साथ उस पर बाजारवाद का प्रभाव बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट प्रभाव और व्यावसायिक हितों ने संपादकीय स्वतंत्रता को प्रभावित किया है, जबकि सोशल मीडिया पर सबसे पहले खबर देने की होड़ ने पत्रकारिता की साख को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने पत्रकारों से एकजुट होकर पेशे की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विज्ञापन आधारित मॉडल और डिजिटल मीडिया के विस्तार ने पारंपरिक पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों में आज भी समर्पण और जुनून की कमी नहीं है, लेकिन बदलते परिवेश में स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए संघर्ष बढ़ गया है।

जार के प्रदेश महासचिव सुरेश पारीक ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग उठाते हुए कहा कि पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।

कार्यक्रम की शुरुआत जार के प्रदेशाध्यक्ष संजय सैनी के स्वागत भाषण से हुई। इस अवसर पर जार जयपुर अध्यक्ष लेशिश जैन, महासचिव विशाल माथुर, ग्रामीण जिला अध्यक्ष सुरेश शर्मा, महासचिव बजरंग शर्मा एवं प्रदेश उपाध्यक्ष जगदीश शर्मा ने अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

गोष्ठी में वक्ताओं ने निष्कर्ष रूप में कहा कि हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए पत्रकारिता को जनहित, निष्पक्षता और विश्वसनीयता के मूल मूल्यों से पुनः जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Pramukh Samvad

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