Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 27 अप्रैल। देशव्यापी ‘गौ पलसम्मान आह्वान अभियान’ के तहत भारत भर में गौभक्तों, साधु-संतों और सामाजिक संगठनों ने हजारों तहसीलों में तहसीलदार/एसडीएम के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। इसी क्रम में सोमवार को कोटा में गोभक्तों ने प्रातः 11 बजे महामंडलेश्वर साध्वी हेमां सरस्वती के सानिध्य में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित लाडपुरा तहसील कार्यालय में तहसीलदार राजवीर यादव को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन एवं 21,155 नागरिकों की हस्ताक्षर युक्त फाइल पत्र (दस्ता) सौंपा गया। इस अवसर पर हेमां सरस्वती के साथ कार्यक्रम संयोजक अनिल माहेश्वरी, गजेन्द्र भार्गव महंत गोदावरी धाम, महेंद्र गोविंदाचार्य चंडीगढ़, पंकज मेहता, यज्ञदत्त हाड़ा, समाजसेवी अरुण भार्गव, गोपाल माहेश्वरी, के के माहेश्वरी, गिरधर बडेरा बांके बिहारी मंदिर समिति, प्रमोद चतर्वेदी, रमेश चंद्र गौतम, रजत सुमन, सूरज,पंकज शर्मा,अरुण शर्मा, अनिल गुप्ता, लोकेश शर्मा, मुकेश मंत्री सहित बड़ी संख्या में गो भक्त उपस्थित रहे।
संकीर्तन शोभा यात्रा निकाली-
ज्ञापन से पूर्व सुबह करीब 11 बजे बड़ी संख्या में गोभक्त ने कलेक्ट्रेट चौराहे पर एकत्रित होकर हाथों में गौ रक्षा से संबंधित तक्तियां बैनर और झंडिया लिए जिन पर “गौ माता की रक्षा ही हमारी सामूहिक चेतना का पुनर्जन्म है”, “गौ सेवा ही सच्ची सेवा है”, “राष्ट्रमाता गौ”, और “गौ हत्या बंद करो” जय गौ माता” जैसे नारे लिखे थे। शोभायात्रा निकाली गई जिसमें राधा कृष्ण की झांकी, गौ माता का बच्चा बछड़ा भी साथ था गर्मी की भयानकता को देखते हुए उसे छाया में ही रखा गया। इस अवसर पर मातृशक्ति और युवा सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने गौ माता की झांकियों और नारों के साथ ‘गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दो’ की मांग की।
वही वक्ताओं ने गाय की रक्षा को सभी का नैतिक कर्तव्य बताया और इसके लिए व्यापक जनजागरण की आवश्यकता पर बल दिया।
ज्ञापन की मुख्य मांगें:
राष्ट्रमाता का दर्जा: गौमाता को आधिकारिक तौर पर ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किया जाए।
गौहत्या पर प्रतिबंध: देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कड़ा केंद्रीय कानून बनाया जाए।
संरक्षण और तस्करी पर रोक: गौवंश की तस्करी, अवैध वधशालाओं और पशु क्रूरता को तुरंत रोका जाए जैसी प्रमुख मांगें उठाई गईं। इसके साथ ही सरकारी गौशालाओं में अव्यवस्था को दूर कर गौवंश की देखभाल सुनिश्चित की जाए।
