भगवान नरसिंह का चार दिवसीय प्राकट्य उत्सव प्रारम्भ

Written by : प्रमुख संवाद

​कोटा, 27 अप्रैल।
​कोटा के प्राचीन नरसिंह मंदिर में भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार, भगवान नरसिंह का चार दिवसीय प्राकट्य उत्सव (नरसिंह जयंती महोत्सव) भक्ति और उत्साह के साथ सोमवार को प्रारंभ हुआ। महोत्सव के प्रथम दिन मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

​कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर के शिखर पर परंपरागत तरीके से पताका फहराकर की गई। भगवान का दिव्य स्वरूप और मंदिर की सजावट देखते ही बन रही थी। सुबह से ही मंदिर में विशेष अभिषेक और आरती का क्रम शुरू हुआ। जहाँ भक्तों ने जयकारों के साथ आकाश गुंजायमान कर दिया।

​पुजारी मयंक शर्मा ने पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए स्तंभ फाड़कर नरसिंह अवतार धारण किया था। उन्होंने कहा कि भगवान नरसिंह शक्ति और सुरक्षा के देवता हैं। जो भी भक्त शुद्ध भाव से उनकी आराधना और व्रत करता है, भगवान उसके जीवन के समस्त कष्टों को हर लेते हैं। उन्होंने आगे बताया कि भगवान ने असुर राज हिरण्यकश्यप का वध कर न केवल प्रहलाद को बचाया, बल्कि संपूर्ण सृष्टि को पापों और अत्याचार से मुक्त कराया था।

आज के कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक संजय गोयल, भुवनेश गहलोत, मुकेश सोनी, हिमांशु शर्मा, पेरख गौतम, सुरेश नायक सहित कई भक्तगण उपस्थित रहे और व्यवस्थाओं में सहयोग दिया।

ये होंगे कार्यक्रम
मंदिर के पुजारी मयंक शर्मा ने बताया कि ​यह महोत्सव आगामी चार दिनों तक निरंतर चलेगा। जिसमें प्रतिदिन भजन संध्या, महाआरती और विशेष झांकियों के दर्शन होंगे। समापन दिवस पर भगवान नरसिंह का मुख्य जन्मोत्सव मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 28 अप्रैल को मंदिर में विशेष ध्वजा पूजन किया जाएगा और भक्तों को मोर पंख के दुर्लभ दर्शन कराए जाएंगे। 29 अप्रैल को भगवान का पंचामृत स्नान कराया जाएगा और मंदिर परिसर में रामायण पाठ का आयोजन होगा। मुख्य उत्सव के दिन, यानी 30 अप्रैल को सुबह 7 बजे भगवान का पंचामृत से महाअभिषेक किया जाएगा। जिसके पश्चात सुबह 8 बजे से प्रभु का मनमोहक श्रृंगार होगा।
इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान का दिव्य ‘फूल बंगला’ दर्शन और मुखौटा दर्शन रहेगा। जो सुबह 11 बजे से भक्तों के लिए उपलब्ध होगा। दोपहर 12 बजे विशेष आरती की जाएगी। जिसके उपरांत मंदिर की ओर से श्रद्धालुओं को विशेष ‘रक्षा कवच’ वितरित किए जाएंगे। उत्सव का भव्य समापन शाम 7 बजे होगा। जिसमें 101 बत्तियों से भगवान की महाआरती उतारी जाएगी। इस दौरान भगवान को छप्पन भोग अर्पित कर महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा।

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