Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 27 अप्रैल।
ब्रह्मकुमारीज़ के शिक्षा प्रभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय “एजुकेशन बियॉन्ड डिग्रीज़” (डिग्री से परे शिक्षा) कॉन्फ्रेंस में देशभर के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर शिक्षा के बदलते स्वरूप और मूल्य-आधारित शिक्षण पर गहन मंथन किया। कार्यक्रम का आयोजन ज्ञान सरोवर, माउंट आबू में किया गया।
सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करने की सोच से आगे बढ़कर छात्रों के सर्वांगीण विकास, सकारात्मक दृष्टिकोण और सशक्त चरित्र निर्माण को प्रोत्साहित करना है।
इस अवसर पर राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) के कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी ने ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए ब्रह्मकुमारीज़ के शिक्षा प्रभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों को अत्यंत प्रासंगिक और प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप युवाओं को सशक्त बनाने के लिए मूल्य-आधारित शिक्षा अनिवार्य है, जिसमें आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का समावेश आवश्यक है।
प्रो. चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि छात्रों के मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने ब्रह्मकुमारीज़ द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दूरगामी और प्रेरणादायक बताया।
उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित “थॉट एंड इन्नोवेशन सेंटर” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से छात्रों में ध्यान, आत्म-जागरूकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। ब्रह्मकुमारीज़ के साथ इस सेंटर के जुड़ाव से इसकी गतिविधियाँ और अधिक प्रभावी बनी हैं।
कॉन्फ्रेंस में राजयोगिनी बीके सुदेश दीदी, एससीईआरटी दिल्ली की निदेशक डॉ. रीता शर्मा, गुजरात राज्य संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष श्री हिमांजल पालीवाल सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने अपने विचार साझा किए।
थॉट एंड इन्नोवेशन सेंटर की मुख्य समन्वयक डॉ. लता गिदवानी ने बताया कि सम्मेलन में यह बात प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है। इस दिशा में ब्रह्मकुमारीज़ और आरटीयू का संयुक्त प्रयास एक प्रेरणादायक पहल के रूप में सामने आ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को समाहित कर युवाओं को एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक के रूप में विकसित करना है।
