Written by : Sanjay kumar
राजस्थान साइबर पुलिस की चेतावनी: सस्ते मोबाइल के लालच में न फंसें, खरीदने से पहले जरूर करें सत्यापन
जयपुर, 2 जून। मोबाइल फोन आज केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि बैंकिंग, पहचान, लेन-देन और व्यक्तिगत जानकारी का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदते समय थोड़ी सी लापरवाही आर्थिक नुकसान के साथ-साथ गंभीर कानूनी परेशानियों का कारण बन सकती है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को आगाह करते हुए कहा है कि बिना सत्यापन के पुराना मोबाइल खरीदना कई बार अपराधियों के जाल में फंसने जैसा साबित हो सकता है।
साइबर क्राइम शाखा के अधिकारियों के अनुसार मोबाइल चोरी की घटनाओं के पीछे केवल आर्थिक लाभ नहीं होता, बल्कि कई बार चोरी किए गए मोबाइल का उपयोग साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग, फर्जी सिम संचालन, बैंक खातों से ठगी, सोशल मीडिया अपराध और संगठित आपराधिक गतिविधियों में भी किया जाता है।
अपराधी क्यों इस्तेमाल करते हैं चोरी के मोबाइल?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार अपराधी अक्सर चोरी के मोबाइल का उपयोग इसलिए करते हैं क्योंकि इससे उनकी वास्तविक पहचान छिपी रहती है। ऐसे मोबाइलों में नई सिम डालकर या फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सिम सक्रिय कर अपराध को अंजाम दिया जाता है।
चोरी के मोबाइलों का उपयोग निम्न अपराधों में देखा गया है—
- साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड
- फर्जी कॉल सेंटर संचालन
- बैंक खातों से ओटीपी हासिल कर धोखाधड़ी
- सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाना
- अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करना
- धमकी, ब्लैकमेल और रंगदारी मांगना
- डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी
- फर्जी निवेश योजनाओं का प्रचार
- पहचान छिपाकर संगठित अपराधों का संचालन
- मोबाइल आधारित वित्तीय अपराध
कैसे फंस सकता है एक निर्दोष खरीदार?
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने सस्ते दाम में पुराना मोबाइल खरीद लिया। बाद में जांच में पता चला कि वही मोबाइल किसी साइबर ठगी, धमकी, ब्लैकमेलिंग या अन्य अपराध में उपयोग हुआ था।
ऐसी स्थिति में पुलिस जांच का पहला आधार मोबाइल का IMEI नंबर और उससे जुड़ी गतिविधियां होती हैं। यदि मोबाइल आपके कब्जे में मिलता है तो पुलिस स्वाभाविक रूप से आपसे पूछताछ करेगी। भले ही आप अपराधी न हों, लेकिन आपको अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए खरीद से जुड़े दस्तावेज, बिल, विक्रेता का विवरण और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में लोग केवल इसलिए परेशान हुए क्योंकि उन्होंने बिना किसी रिकॉर्ड के सेकेंड हैंड मोबाइल खरीद लिया था।
मोबाइल खरीदते समय रखें ये सावधानियां
- हमेशा मोबाइल का मूल बिल मांगें।
- विक्रेता की पहचान का प्रमाण लें।
- खरीद-बिक्री का लिखित रिकॉर्ड रखें।
- नकद लेन-देन की बजाय डिजिटल भुगतान करें ताकि रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
- IMEI नंबर का सत्यापन अवश्य करें।
- अत्यधिक सस्ते दाम पर मिलने वाले मोबाइल से सावधान रहें।
- लॉक, ब्लैकलिस्टेड या संदिग्ध मोबाइल कभी न खरीदें।
- यदि मोबाइल की उत्पत्ति संदिग्ध लगे तो तुरंत खरीदने से बचें।
KYM सेवा क्या है?
केंद्रीय दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल पर “Know Your Mobile (KYM)” सुविधा उपलब्ध है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति मोबाइल खरीदने से पहले उसके IMEI नंबर की जांच कर सकता है।
इससे यह पता लगाया जा सकता है कि मोबाइल—
- चोरी का तो नहीं है
- ब्लैकलिस्टेड तो नहीं है
- ब्लॉक तो नहीं किया गया है
- किसी संदिग्ध रिकॉर्ड में दर्ज तो नहीं है
ऐसे करें जांच
- मोबाइल से *#06# डायल करें।
- स्क्रीन पर दिखाई देने वाला 15 अंकों का IMEI नंबर नोट करें।
- मैसेज बॉक्स में KYM लिखकर स्पेस दें और IMEI नंबर टाइप करें।
- इसे 14422 पर भेज दें।
- कुछ ही क्षण में मोबाइल का स्टेटस प्राप्त हो जाएगा।
इसके अलावा KYM ऐप अथवा CEIR पोर्टल के माध्यम से भी IMEI सत्यापन किया जा सकता है।
गुनहगार पकड़े जाएं, बेगुनाह बचें
राजस्थान पुलिस का कहना है कि तकनीक के इस दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। एक छोटी सी जांच न केवल आपकी मेहनत की कमाई बचा सकती है बल्कि आपको अनावश्यक पुलिस जांच, कानूनी विवाद और अपराधियों के नेटवर्क से भी दूर रख सकती है।
याद रखें, चोरी का मोबाइल खरीदना केवल आर्थिक जोखिम नहीं है। कई बार यह आपको ऐसे अपराध की जांच के दायरे में ला सकता है, जिससे आपका कोई संबंध ही न हो। इसलिए सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदने से पहले KYM सत्यापन अवश्य करें, ताकि असली गुनहगार पकड़े जाएं और बेगुनाह लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
