कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स अब एक मंच पर, हितों की लड़ाई के लिए महासंघ का गठन

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 2 जून। राजस्थान के कृषि विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों के हितों की रक्षा तथा उनकी विभिन्न लंबित समस्याओं के समाधान के लिए राज्य स्तर पर “राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ” का गठन किया गया है। महासंघ में प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स संगठनों को शामिल किया गया है, जिससे अब हजारों पेंशनर्स की आवाज एक मंच से उठाई जा सकेगी।

महासंघ में शामिल विश्वविद्यालयों में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर, कृषि विश्वविद्यालय कोटा, कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर तथा कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर शामिल हैं। महासंघ का उद्देश्य पेंशनर्स से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना तथा राज्य सरकार के समक्ष उनकी समस्याओं को संगठित रूप से रखना है।

महासंघ की सर्वसम्मति से घोषित कार्यकारिणी में इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह सोलंकी (उदयपुर) को प्रदेशाध्यक्ष तथा इंजीनियर अरविंद कौशल (कोटा) को प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया गया है। कोटा से डॉ. अरूण कुमार शर्मा को प्रदेश उपाध्यक्ष तथा महावीर शर्मा को प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रदेश कार्यकारिणी में डॉ. अरूण कुमार शर्मा, मनफूल मांगलिया, मुलचंद जाट, डॉ. आर.एस. चावड़ा एवं डॉ. सुरेन्द्र कुमार भटनागर को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं महावीर शर्मा, नेमाराम, इंजीनियर मोहनलाल चांगवाल, डॉ. भारत सिंह भीमावत एवं डॉ. भूपेन्द्र उपाध्याय को प्रदेश मंत्री तथा इंजीनियर एस.बी. सहाय को प्रदेश संगठन मंत्री नियुक्त किया गया है।

नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि महासंघ कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स को समय पर पेंशन, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक जीवन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स को एक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।

प्रदेश महामंत्री इंजीनियर अरविंद कौशल ने बताया कि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) से संबंधित व्यावहारिक समस्याएं, कैशलेस चिकित्सा सुविधा में आने वाली कठिनाइयां, दवाओं की उपलब्धता तथा अन्य प्रशासनिक मुद्दे महासंघ की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे। इन विषयों पर राज्य सरकार और संबंधित विभागों से नियमित संवाद स्थापित किया जाएगा।

प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अरूण कुमार शर्मा ने कहा कि महासंघ शीघ्र ही राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से मुलाकात कर कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स की समस्याओं एवं मांगों का विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत करेगा, ताकि उनके स्थायी एवं प्रभावी समाधान का मार्ग प्रशस्त हो सके।

महासंघ के गठन पर विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे सेवानिवृत्त कर्मचारियों और शिक्षकों के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक पहल बताया है।

Pramukh Samvad

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