Sanjay kumar, 14 June 2026
ऑनलाइन ठगी का शिकार होने के बाद अधिकांश लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि उनका पैसा वापस मिलेगा या नहीं। इसी चिंता को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू की है, जिससे साइबर अपराध के मामलों में फ्रीज की गई रकम को वापस पाने की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान और पारदर्शी हो सकेगी।
क्या है नया MRM सिस्टम?
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के तहत मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) शुरू किया है। यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए साइबर ठगी के पीड़ित घर बैठे रिफंड प्रक्रिया के लिए आवेदन कर सकेंगे।
पहले पीड़ितों को बैंक, पुलिस और कई बार अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन किया जा रहा है।
हर मामले में नहीं मिलेगा रिफंड
यह समझना जरूरी है कि MRM कोई जादुई समाधान नहीं है। पैसा तभी वापस मिल सकेगा जब ठगी के तुरंत बाद शिकायत दर्ज कराई गई हो और रकम अपराधी के खाते में ट्रेस होकर फ्रीज कर दी गई हो।
यदि पैसा दूसरे खातों में ट्रांसफर हो चुका है या निकाल लिया गया है, तो रिफंड मिलना मुश्किल हो सकता है।
1930 पर तुरंत शिकायत करना क्यों जरूरी है?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ठगी के बाद शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसलिए ठगी का पता चलते ही—
• 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
• NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
• संबंधित बैंक को तुरंत सूचना दें।
• ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें।
समय पर शिकायत ही रकम बचाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
रिफंड की तीन श्रेणियां
सरकार ने राशि के आधार पर रिफंड प्रक्रिया को तीन हिस्सों में बांटा है।
50 हजार रुपये तक की राशि
• एफआईआर की जरूरत नहीं।
• कोर्ट ऑर्डर आवश्यक नहीं।
• पुलिस शिकायत के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
50 हजार रुपये से अधिक, लेकिन कई खातों में विभाजित राशि
• एफआईआर आवश्यक नहीं।
• कोर्ट ऑर्डर की जरूरत नहीं।
• पुलिस सत्यापन के बाद कार्रवाई होगी।
एक खाते में 50 हजार रुपये से अधिक राशि
• एफआईआर अनिवार्य।
• न्यायालय का आदेश जरूरी।
• इसके बाद ही रिफंड प्रक्रिया पूरी होगी।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
पीड़ित को MRM पोर्टल पर जाकर उसी मोबाइल नंबर से लॉगिन करना होगा, जिससे साइबर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद शिकायत संख्या दर्ज कर रिफंड अनुरोध भेजा जा सकेगा।
आवेदन के दौरान पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, पहचान पत्र तथा आवश्यक होने पर एफआईआर या कोर्ट ऑर्डर अपलोड करना होगा। आवेदन जमा होने के बाद ट्रैकिंग नंबर जारी किया जाएगा, जिससे मामले की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकेगी।
संचार साथी भी कर रहा मदद
जहां MRM ठगी के बाद रकम वापस दिलाने का प्रयास करता है, वहीं दूरसंचार विभाग का “संचार साथी” प्लेटफॉर्म साइबर अपराधों की रोकथाम में मदद कर रहा है।
इसके जरिए नागरिक—
• खोया या चोरी हुआ मोबाइल ब्लॉक कर सकते हैं।
• संदिग्ध कॉल और संदेशों की शिकायत कर सकते हैं।
• IMEI की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
• अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच कर सकते हैं।
मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए राहत भरी पहल है। हालांकि यह हर मामले में पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं देता, लेकिन समय पर शिकायत और रकम फ्रीज होने की स्थिति में रिफंड की संभावना काफी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी होने पर बिना देरी किए 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराना ही सबसे बड़ा बचाव है।
