टेलीग्राम पर बिक रहा था री-नीट का फर्जी प्रश्नपत्र, पुलिस की दबिश में खुला बड़ा खेल

Written by : Sanjay kumar

भीलवाड़ा, 19 जून। री-नीट यूजी 2026 परीक्षा से ठीक पहले फर्जी पेपर बेचने वाले एक संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए भीलवाड़ा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रतापनगर थाना क्षेत्र में गुरुवार-शुक्रवार की मध्यरात्रि की गई छापेमारी में एक युवक को गिरफ्तार किया गया, जो सोशल मीडिया और टेलीग्राम के जरिए छात्रों को कथित नीट पेपर बेचकर ठगी कर रहा था।

गुप्त सूचना से खुला राज
भीलवाड़ा एसपी सागर राणा के निर्देश पर गठित विशेष टीम को सूचना मिली थी कि कुछ लोग री-नीट परीक्षा के नाम पर फर्जी और बोगस प्रश्नपत्र तैयार कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेच रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।

अमेरिकी वीपीएन से चला रहा था खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम अकाउंट संचालित करने के लिए अमेरिका आधारित वीपीएन और प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा था, ताकि उसकी पहचान और लोकेशन छिपी रहे। इसी माध्यम से वह छात्रों तक कथित नीट पेपर पहुंचाने और उनसे पैसे वसूलने का प्रयास कर रहा था।

आधी रात दबिश, मौके पर पकड़ा गया आरोपी
प्रतापनगर थाना क्षेत्र के पटेल नगर स्थित एक मकान पर दबिश के दौरान पुलिस ने 19 वर्षीय आकाश को हिरासत में लिया। जांच में सामने आया कि वह ऑनलाइन माध्यम से री-नीट का फर्जी पेपर प्रसारित कर रहा था। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जयपुर में करता था प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी
गिरफ्तार आरोपी मूलतः चूरू जिले का निवासी है और जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। पुलिस के अनुसार वह दो दिन पहले ही जयपुर से भीलवाड़ा लौटा था। मौके से मोबाइल फोन, नीट संबंधी अध्ययन सामग्री और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

बड़े नेटवर्क की तलाश में पुलिस
प्रारंभिक जांच के बाद अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेला काम कर रहा था या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस फर्जी पेपर रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और इसके संचालन के तरीके को लेकर महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

परीक्षार्थियों को चेतावनी
पुलिस ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि परीक्षा से पहले किसी भी कथित पेपर लीक, वायरल प्रश्नपत्र या सोशल मीडिया पर बेचे जा रहे पेपर के झांसे में न आएं। ऐसे अधिकांश दावे फर्जी होते हैं और साइबर ठगी का हिस्सा साबित होते हैं।

Pramukh Samvad

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