5 प्रसूताओं की मौत के बाद हुई जांच, इंजेक्शन को लेकर खुलासा, फर्म का लाइसेंस निरस्त

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 25 जून। कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामले की जांच के दौरान दवा आपूर्ति व्यवस्था में एक गंभीर अनियमितता सामने आने के बाद औषधि नियंत्रक संगठन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में डिलीवरी के दौरान उपयोग किए जाने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के नमूनों में निर्धारित औषधीय तत्व नहीं मिलने पर संबंधित सप्लायर फर्म का ड्रग लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार इन्द्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया स्थित मैसर्स राजस्थान मेडिकल हॉल के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। फर्म के स्वामी महेश मित्तल बताए जा रहे हैं। औषधि विभाग की जांच में सामने आया कि परीक्षण के लिए भेजे गए इंजेक्शन नमूनों में अपेक्षित औषधीय घटक नहीं पाया गया, जिसके बाद विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की।

हालांकि यह स्पष्ट किया जा रहा है कि जांच में सामने आई दवा संबंधी अनियमितता और प्रसूताओं की मौत के बीच प्रत्यक्ष संबंध अभी तक स्थापित नहीं हुआ है। यह भी सिद्ध नहीं हुआ है कि प्रसूताओं की मौत उक्त इंजेक्शन के कारण हुई। दोनों मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर जारी है। दवा नमूनों की जांच में मिली खामियां केवल आपूर्ति और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

सूत्रों के अनुसार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैम्पल फेल होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा सप्लायर फर्म के खिलाफ अब तक अंतिम स्तर की कार्रवाई नहीं की गई है। अस्पताल प्रशासन ने कॉलेज प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था, जिसके बाद फर्म को ब्लैकलिस्ट करने और आर्थिक दंड लगाने संबंधी प्रस्ताव लेखा विभाग को भेजा गया है।

अब सभी की निगाहें मेडिकल कॉलेज प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। एक ओर प्रसूताओं की मौत के मामले की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर दवा आपूर्ति प्रणाली में सामने आई इस अनियमितता ने अस्पतालों में गुणवत्ता नियंत्रण और खरीद प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

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