योग्य पात्रता, संयम और वैराग्य से ही खुलता है आत्मकल्याण का मार्ग : मुनि श्री 108 योगसागर महाराज

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 31 जुलाई। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में आयोजित चातुर्मास प्रवचनमाला में परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ने कहा कि आत्मकल्याण और आध्यात्मिक उपलब्धियां केवल इच्छा से नहीं, बल्कि योग्य पात्रता, शुद्ध आचरण, तप, त्याग, संयम और वैराग्य से प्राप्त होती हैं।

मुनिश्री ने कहा कि जिस प्रकार प्रत्येक कार्य के लिए उपयुक्त साधन आवश्यक होते हैं, उसी प्रकार आत्मोन्नति के लिए भी साधक का जीवन शुद्ध, संयमित और दोषरहित होना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे बाहरी आडंबरों से आगे बढ़कर आत्मचिंतन, सदाचार, विनय और आत्मशुद्धि को जीवन का आधार बनाएं। यही मोक्षमार्ग की वास्तविक दिशा है।

समिति के अनुसार चातुर्मास प्रवचनमाला में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर जिनवाणी श्रवण एवं धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ तथा अनेक श्रद्धालु परिवारों ने शांतिधारा, भक्तामर विधान, शास्त्र भेंट, आहारदान एवं अन्य धार्मिक आयोजनों का पुण्यार्जन प्राप्त किया।

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