Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 24 अगस्त। जिले के रनपुर इलाके के पूनिया देवरिया राजकीय विद्यालय में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) ग्रहण करने के बाद अचानक छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य में भारी गिरावट दर्ज की गई। आठवीं तक के इस विद्यालय में कुल 130 विद्यार्थियों का नामांकन है, जिसमें से सोमवार को 110 बच्चे स्कूल में मौजूद थे और उन्हें निर्धारित समयानुसार भोजन परोसा गया था। लेकिन दोपहर 12 बजे के बाद लगभग 27 बच्चों को अचानक उल्टी, दस्त और चक्कर आने जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं, जिससे बच्चों और शिक्षकों में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति की नजाकत को देखते हुए तुरंत प्रशासनिक मदद और एम्बुलेंस की सहायता से प्रभावित बच्चों में से 14 गंभीर बच्चों को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लाया गया, जहां उनका आपातकालीन उपचार शुरू किया गया और फिलहाल उनमें से 4-5 बच्चे ही अस्पताल में भर्ती हैं जबकि बाकी की स्थिति ठीक बताई जा रही है।
पीड़ित बच्चों की जुबानी खौफनाक दास्तान और लक्षण
अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कहराते हुए बच्चों ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि भोजन में परोसी गई सब्जी खाते ही उनकी तबियत तेजी से बिगड़ने लगी थी। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र अर्जुन भील ने बताया कि कद्दू की सब्जी में कुछ खराब था और उसके ठीक दो घंटे बाद अचानक उनके पेट में तेज दर्द शुरू हो गया और लगातार उल्टियां होने लगीं, जिसके बाद स्कूल में मौजूद शिक्षकों ने उन्हें संभाला। पांचवीं कक्षा की छात्रा प्रिया ने बताया कि विद्यालय के सभी बच्चों ने एक साथ खाना खाया था लेकिन सब्जी खाने के तुरंत बाद उसे उल्टी होने लगी, जिसके बाद वह घर आ गई और उसकी बुआ उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचीं। चौथी कक्षा के छात्र राहुल ने बताया कि कद्दू की सब्जी खाते ही उसे चक्कर आने लगे और वह बेहोश होकर नीचे गिर गया, जिसके बाद घर जाने पर भी जब उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो स्कूल वाले उसे वापस अस्पताल लेकर आए।
स्कूल प्रबंधन और अन्नपूर्णा रसोई की भोजन आपूर्ति का सच
विद्यालय के इंचार्ज चंद्र प्रकाश मीना ने मीडिया और अधिकारियों को जानकारी देते हुए बताया कि कुल 9 अलग-अलग स्कूलों के लिए एक ही जगह से भोजन की आपूर्ति की जाती है और आज भी केवलनगर स्थित अन्नपूर्णा रसोई से ही बच्चों के लिए खाना बनकर आया था। बच्चों को सुबह करीब 10 बजे भोजन खिलाया गया था जिसके कुछ घंटों बाद यह पूरी घटना सामने आई। इस बड़े पैमाने पर भोजन वितरण व्यवस्था के कारण यह सवाल खड़ा हो गया कि यदि एक ही जगह से भोजन कई अन्य स्कूलों में भी गया था, तो सिर्फ इसी विद्यालय के बच्चों के साथ ही यह गंभीर हादसा क्यों पेश आया।
शिक्षा अधिकारियों का पक्ष और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार
मामले की गंभीरता को भांपते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रूप सिंह मीना तुरंत हरकत में आए और उन्होंने स्पष्ट किया कि 9 स्कूलों में एक ही जगह से खाना गया था, जिसके बाद बाकी के सभी संबंधित स्कूलों में तुरंत पता करवा लिया गया है और गनीमत यह है कि अन्य किसी भी विद्यालय से बच्चों की तबियत बिगड़ने की कोई सूचना नहीं मिली है। मौके पर तुरंत मेडिकल टीमों को भी भेज दिया गया है ताकि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा सके। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दौर में यह सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता कि तबीयत सिर्फ खाना खाने से ही बिगड़ी है, और इसके असली और पुख्ता कारणों का खुलासा केवल विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
