Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 19 जनवरी।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर पीठ) के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर के दायरे में स्थित 1,102 शराब दुकानों को हटाकर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे। इस फैसले से राज्य सरकार के साथ-साथ शराब लाइसेंस धारकों को तत्काल अंतरिम राहत मिली है।
राजस्थान सरकार और लाइसेंस धारकों की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे, ने हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम स्टे लगा दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों के विस्तृत जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी।
तमिलनाडु बनाम के. बालू फैसले का हवाला
राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय तमिलनाडु राज्य बनाम के. बालू और उसके बाद जारी स्पष्टीकरणों के विपरीत है।
उन्होंने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2017, 11 जुलाई 2017 और 23 फरवरी 2018 के आदेशों के माध्यम से मूल निर्देशों में आवश्यक शिथिलता प्रदान की थी, विशेषकर शहरी क्षेत्रों और नगर निगम सीमाओं के भीतर स्थित दुकानों के संदर्भ में।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत हाईकोर्ट, संविधान के अनुच्छेद-141 के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून की अवहेलना नहीं कर सकता और न ही राज्यों को दी गई नीति-निर्माण की विवेकाधीन शक्ति को सीमित कर सकता है।
शराब लाइसेंस धारकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और नवीन पाहवा ने भी समान तर्क रखते हुए कहा कि हाईकोर्ट का आदेश व्यावहारिक कठिनाइयों के साथ-साथ पूर्ववर्ती न्यायिक निर्देशों के विपरीत है। इन याचिकाओं को राज्य सरकार की याचिका के साथ संयुक्त रूप से सुना गया।
क्या था हाईकोर्ट का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने 24 नवंबर 2025 को कन्हैया लाल सोनी एवं अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में अंतरिम आदेश पारित किया था।
न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर के भीतर स्थित सभी शराब दुकानों की पहचान करे और उन्हें निर्धारित समय सीमा में हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित करे। इसके अनुपालन में शपथपत्र दाखिल करने के भी निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट की चिंता और सुप्रीम कोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सड़क हादसों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि शहरी विस्तार को सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा मानकों को कमजोर करने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिक बताते हुए हाईवे के आसपास शराब की उपलब्धता से होने वाले हादसों और संभावित 2,100 करोड़ रुपये के राजस्व प्रभाव का उल्लेख किया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अंतरिम आदेश पर रोक लगाते हुए फिलहाल राज्य सरकार और लाइसेंस धारकों को राहत प्रदान की है। अब मामले का अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत सुनवाई के बाद होगा, जिससे न केवल राजस्थान बल्कि देशभर में हाईवे के आसपास स्थित शराब दुकानों की नीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
