लंबित पदोन्नति व स्थानांतरण विसंगतियों पर भड़का आक्रोश: कोटा सुपर थर्मल में संयुक्त संघर्ष समिति का शक्ति प्रदर्शन, मुख्य अभियंता को दिया ज्ञापन

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा: 26 फरवरी

कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन में आज संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में कर्मचारियों ने लंबित मांगों एवं पदोन्नति संबंधी विसंगतियों को लेकर एक प्रभावशाली आक्रोश रैली का आयोजन किया। रैली मुख्य द्वार से प्रारंभ होकर मुख्य अभियंता कार्यालय तक पहुंची, जहां कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण किन्तु जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।

संघर्ष समिति के मीडिया समन्वयक रवि गौतम ने बताया कि विशेष स्थानांतरण योजना–2018 के अंतर्गत पदस्थापन एवं पदोन्नति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। पिछले पांच वर्षों से नियमित पदोन्नति न होने के कारण कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा कार्मिकों को दोहरा लाभ प्रदान किया गया, जिससे मूल कर्मचारियों की वरिष्ठता प्रभावित हुई और पदोन्नति प्रक्रिया बाधित हुई है।

प्रदर्शन के दौरान मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई, जब आक्रोशित कर्मचारियों की तैनात सुरक्षा कर्मियों से तीखी बहस हुई। तत्पश्चात मुख्य अभियंता शिखा अग्रवाल ने सकारात्मक पहल करते हुए स्वयं कार्यालय से बाहर आकर संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन स्वीकार किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि मामले को निगम स्तर पर उठाकर शीघ्र समाधान हेतु वार्ता की जाएगी।

इस अवसर पर संयुक्त संघर्ष समिति से संबद्ध तीनों यूनियनों के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को संबोधित किया। राम सिंह शेखावत ने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रहेगा और किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। कर्मचारी नेता वीरेंद्र कश्यप ने प्रशासन से त्वरित एवं ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कैलाश कच्छावा ने कर्मचारियों से एकजुटता बनाए रखने का आह्वान करते हुए इसे सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बताया।

संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन द्वारा समयबद्ध एवं न्यायसंगत निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी चरण में एक दिवसीय सांकेतिक धरना आयोजित किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

समिति ने दो टूक शब्दों में कहा कि कर्मचारी अब अपने अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगे और न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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