ई-केवाइसी सख्ती के बाद बड़ी छंटनी: प्रदेश में 26 लाख नाम सूची से बाहर, कोटा में 1.70 लाख अपात्र हटे

Written by : Sanjay kumar

कोटा, 26 फरवरी।
राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना में पारदर्शिता और वास्तविक पात्रों को ही लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ई-केवाइसी को अनिवार्य कर दिया है। इस सख्ती के बाद प्रदेशभर में अब तक 26 लाख लाभार्थियों के नाम पात्रता सूची से विलोपित किए जा चुके हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में कुल 89 लाख 1 हजार 39 अपात्र व्यक्तियों को सूची से हटाया गया है, जबकि इसी अवधि में 85 लाख 65 हजार 190 नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ा भी गया है।

कोटा जिले में भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई हुई है। यहां ई-केवाइसी नहीं करवाने वाले लगभग 50 हजार लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि कुल मिलाकर पिछले तीन वर्षों में 1 लाख 70 हजार अपात्र व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा सूची से बाहर किया गया है।

28 फरवरी तक ‘गिव अप’ का अवसर

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत संचालित खाद्य सुरक्षा योजना में अपात्र लाभार्थियों को स्वेच्छा से नाम हटाने का अवसर दिया गया है। ‘गिव अप अभियान’ के तहत ऐसे व्यक्ति 28 फरवरी तक अपनी सब्सिडी छोड़ सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि के बाद अपात्र पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों से 27 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं की राशि की वसूली की जाएगी।

कौन माने जाएंगे अपात्र

विभागीय नियमों के अनुसार जिन परिवारों के पास चारपहिया वाहन, पक्का मकान अथवा पर्याप्त भूमि-संपत्ति है, जो आयकर दाता हैं या जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में है, वे खाद्य सुरक्षा योजना के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। ऐसे मामलों में स्वैच्छिक परित्याग को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।

ई-केवाइसी क्यों जरूरी

ई-केवाइसी (इलेक्ट्रॉनिक ‘नो योर कस्टमर’) प्रक्रिया के तहत राशन कार्ड को आधार से लिंक कर बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जाता है। इसका उद्देश्य फर्जी और दोहराव वाले नामों को हटाना तथा वास्तविक जरूरतमंदों को ही सस्ता अनाज उपलब्ध कराना है। राशन कार्ड में दर्ज प्रत्येक सदस्य का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। निर्धारित समयावधि में ई-केवाइसी नहीं कराने वालों को अपात्र मानते हुए सूची से हटाया जा रहा है।

कोटा की स्थिति

राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2013 से हुई थी। प्रारंभिक चरण में व्यापक पंजीयन के कारण कई अपात्र नाम भी सूची में जुड़ गए थे। अब विभागीय पुनर्सत्यापन और ई-केवाइसी के माध्यम से सूची को शुद्ध किया जा रहा है। कोटा जिले में अब तक अपात्रों से कोई वसूली नहीं की गई है, लेकिन 28 फरवरी के बाद नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पात्र नागरिकों से समय पर ई-केवाइसी पूर्ण कराने और अपात्र व्यक्तियों से स्वेच्छा से योजना का परित्याग करने की अपील की है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!