Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 12 अप्रैल। श्री नाहरसिंगी माता मंदिर वेद विद्यालय, धर्मपुरा में आयोजित सनातन धर्म संवाद एवं गौरक्षा प्रवचन कार्यक्रम में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने वेद, धर्म और गौ संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेदों के बिना धर्म केवल एक काल्पनिक कथा बनकर रह जाएगा, क्योंकि वेद ही सनातन परंपरा के मूल आधार हैं।
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि जब हम भगवान राम के दर्शन करते हैं, तो यह विचार नहीं करते कि भगवान राम स्वयं किस उद्देश्य से पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ माता की रक्षा और धर्म की स्थापना ही उनके अवतार का प्रमुख कारण था। उन्होंने समाज को आत्ममंथन का संदेश देते हुए कहा कि यदि हम गौ माता के कष्ट और पीड़ा को नहीं समझते, तो हमारी पूजा और आराधना अधूरी है।
गौ मांस निर्यात के मुद्दे पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत जैसे धर्मप्रधान देश में कभी ऋषि-मुनियों ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि यहां गौ हत्या होगी और उसका व्यापार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, और यदि चुनी हुई सरकारें गौ हत्या को बढ़ावा देती हैं, तो उसके लिए कहीं न कहीं जनता भी जिम्मेदार है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में ट्रस्ट अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने शंकराचार्य का स्वागत करते हुए कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि वे सम्पूर्ण मानव जीवन के विकास का आधार हैं। उन्होंने बताया कि यह वेद विद्यालय हाड़ौती क्षेत्र का एकमात्र संस्थान है, जहां चारों वेदों की शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राचीन काल में जब आधुनिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था, तब वेद ही विज्ञान और समाज की शिक्षा का प्रमुख स्रोत थे।
कार्यक्रम की शुरुआत शंकराचार्य द्वारा गो माता पूजन एवं नाहरसिंगी माता की आरती के साथ हुई। इसके पश्चात वेद विद्यालय के बटुकों ने शंकराचार्य से धर्म और वेद से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर संवाद किया, जिसका उन्होंने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया।
इस अवसर पर बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा, पूर्व विधायक पूनम गोयल, जिला अध्यक्ष महावीर मीणा, वेद विद्यालय समिति अध्यक्ष महेंद्र शर्मा, प्रेस क्लब अध्यक्ष गजेंद्र व्यास, डॉ. निशिता दीक्षित, बृजेश शर्मा ‘नीटू’ सहित अनेक गणमान्य नागरिक, आचार्यगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने शंकराचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया।
