कोटा से राहुल गांधी की हुंकार: “यह एजुकेशन नहीं, बच्चों को कुचलने वाला रिजेक्शन सिस्टम है”

Written by : Sanjay kumar

हाथ में सुसाइड करने वाली छात्रा आकांक्षा की चिट्ठी लेकर भावुक हुए राहुल, कहा- ‘सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया’ यह उसकी नहीं, पूरे सिस्टम की नाकामी है!

कोटा के दशहरा मैदान से ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का आगाज़; बिना राजनीतिक शब्दों के देश की शिक्षा व्यवस्था के ‘डार्क सीक्रेट्स’ को किया बेनकाब

कोटा, 17 जून 2026
शिक्षा नगरी कोटा देश की छात्र राजनीति और शिक्षा व्यवस्था पर एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच पर हजारों छात्र-छात्राओं के बीच ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत की। पारंपरिक सियासी लफ्फाजी से दूर, राहुल गांधी का यह अंदाज बिल्कुल अलग था। उन्होंने मंच पर आते ही अंग्रेजी और हिंदी में युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए पूछा, “हाउ इज एवरीबॉडी? ऑल वेल?” उन्होंने साफ किया कि आज उन्हें आपके सामने, कोटा के युवाओं के सामने खड़े होकर बात करने में बेहद खुशी और गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने मंच से सीधे शब्दों में कहा कि वह यहाँ क्यों आए हैं, यह बात बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर कर देना चाहते हैं। यह कोई राजनीतिक सभा यानी पॉलिटिकल मीटिंग नहीं है। यह मीटिंग पूरी तरह से आपके बारे में है। यह उन युवाओं के बारे में है, जो अपने भविष्य को संवारने के लिए हर दिन संघर्ष कर रहे हैं। राहुल गांधी ने मंच से प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि आज की शाम उनके मुंह से भाजपा, कांग्रेस, राजनीति या चुनाव जैसे शब्द बिल्कुल नहीं निकलेंगे। आज की शाम सिर्फ और सिर्फ आपके लिए है, आप हर दिन जिन चुनौतियों का सामना करते हैं, जिन मुश्किलों और स्ट्रेस से गुजरते हैं, आज बात सिर्फ उस पर होगी। लेकिन जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, उन्होंने देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली की उन परतों को उधेड़ कर रख दिया, जिसे उन्होंने “एजुकेशन नहीं, बल्कि युवाओं को असफल घोषित करने वाला रिजेक्शन सिस्टम” करार दिया।

जब हाथ में ‘आकांक्षा की चिट्ठी’ देख थम गईं हजारों सांसें

संबोधन के बीच माहौल तब बेहद भावुक और गंभीर हो गया जब राहुल गांधी ने हाथ में एक कागज लहराया। यह कोटा में सुसाइड करने वाली छात्रा आकांक्षा की वो आखिरी चिट्ठी थी, जो उसने दुनिया छोड़ने से पहले अपने माता-पिता को लिखी थी। मंच पर लगी बड़ी स्क्रीन पर उस चिट्ठी को दिखाते हुए राहुल गांधी ने रुंधे गले से युवाओं से कहा कि आप इस चिट्ठी को 15 सेकंड के लिए अच्छी तरह से पढ़िए। इसके बाद उन्होंने उसकी आखिरी लाइनें पढ़ीं— “सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया आप दोनों का…”

खचाखच भरे मैदान में सन्नाटा पसर गया। राहुल गांधी ने बेहद भावुक होकर बताया कि कुछ दिन पहले ही मेरी आकांक्षा के पिता से बात हुई थी। वह पैरालाइज्ड हैं। उन्होंने भारी कर्ज लेकर अपनी बेटी को कोटा पढ़ने भेजा था, ताकि उसका भविष्य सुधर सके। लेकिन परीक्षा के समय नीट (NEET) का पेपर लीक हो गया और उसकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया। राहुल गांधी ने तीखे लहजे में कहा कि सच्चाई यह है कि यह आकांक्षा की गलती नहीं थी, न ही उसके माता-पिता की। यह हिंदुस्तान की उस शिक्षा व्यवस्था की गलती है जो अपने बच्चों को आगे बढ़ने का रास्ता देने के बजाय उन पर असहनीय दबाव डालती है, स्ट्रेस देती है, उन्हें मानसिक रूप से दबाती है और अंततः कुचल देती है। उन्होंने संकल्प लिया कि हम सबको एक साथ मिलकर काम करना होगा ताकि इस भीड़ में बैठा कोई भी छात्र, या इस देश का कोई भी युवा कभी भी वैसा महसूस न करे जैसा उस बच्ची ने महसूस किया था। देश के किसी भी बच्चे के मन में खुद को खत्म करने का विचार तक नहीं आना चाहिए। आज की यह बैठक इसी बारे में है कि हमारे शिक्षा तंत्र में क्या खराबी है और हमें क्या सुधारने की जरूरत है।

पायलट बनना चाहती थीं लड़कियां, पर सिस्टम ने दिए सिर्फ पांच ऑप्शन

राहुल गांधी ने अपनी 4,000 किलोमीटर की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का एक दिलचस्प और आंखें खोलने वाला वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा के दौरान रास्ते में वह आप जैसे लाखों युवाओं से मिले। हजारों युवाओं से उनका सीधा संवाद और डिस्कशन हुआ। उस पूरी यात्रा के दौरान उनका युवाओं से एक ही सवाल होता था कि ‘आप क्या करना चाहते हो?’ इस पर उन्हें घूम-फिरकर सिर्फ पांच ही जवाब मिलते थे, छठा कोई जवाब ही नहीं मिलता था। वे पांच विकल्प थे— इंजीनियर, डॉक्टर, लॉयर, आईएएस या फौज (डिफेंस फोर्सेज)।
उन्होंने आगे कहा कि मेरे दिमाग में पहला सवाल यही उठा कि देश के युवा तो देश का भविष्य होते हैं, फिर हमारा एजुकेशन सिस्टम हमारे युवाओं को सिर्फ ये पांच ऑप्शंस क्यों देता है? यात्रा के दौरान मैंने 15-16 लड़कियों के साथ एक विशेष मीटिंग की और उनसे पूछा कि क्या करना चाहती हो? वहां भी किसी ने कहा इंजीनियर, किसी ने कहा डॉक्टर तो किसी ने लॉयर। वही पांच जवाब मिले। तब मैंने उनसे कहा कि मुझे सच बताओ, तुम्हारे दिल में क्या है, असलियत क्या है? तब जाकर असल सच्चाई सामने आई कि वे जो दिल से करना चाहती थीं और जो ये पांच ऑप्शंस थे, इसमें बहुत बड़ा फर्क था। कोई ऑथर बनना चाहती थी, कोई डांसर तो कोई एस्ट्रोनॉट बनना चाहती थी। इसके बाद मैंने एक टेस्ट किया और उन्हीं लड़कियों से पूछा कि आपमें से कितनी लड़कियां पायलट बनना चाहती हैं? उस समय एक भी लड़की ने हाँ नहीं कहा। पास ही मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर खड़ा था। मैंने हेलीकॉप्टर के पायलट से कहा कि इन पांच-छह लड़कियों को आप हेलीकॉप्टर में ले जाइए, जॉय राइड कराइए और कॉकपिट दिखाइए। लड़कियां हेलीकॉप्टर पर गईं और जैसे ही वे वापस आईं, मैंने फिर से वही सवाल पूछा कि अब बताओ क्या करना चाहती हो? तो उन सारी की सारी लड़कियों ने एक सुर में कहा— “हम पायलट बनना चाहती हैं!” राहुल गांधी ने सीधा हमला करते हुए कहा कि हमारा एजुकेशन सिस्टम बच्चों के अनूठे सपनों का सम्मान नहीं करता, उनकी इच्छाओं की रिस्पेक्ट नहीं करता, बल्कि उनके सपनों को मारकर उन्हें जबरन एक तय भेड़चाल में धकेल देता है।

‘जेब काटने का जरिया’ बनी पढ़ाई; सरकारी तंत्र फेल, प्राइवेट सेक्टर बेलगाम

युवाओं से सीधा संवाद करते हुए राहुल गांधी ने देश की शिक्षा के बाजारीकरण पर बड़े सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि देश का पब्लिक सेक्टर (सरकारी) शिक्षा तंत्र क्यों तबाह हो गया और प्राइवेट सेक्टर की पढ़ाई इतनी महंगी क्यों हो गई कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार कर्ज के गहरे जाल में फंस रहे हैं? उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के युवा ही देश का भविष्य हैं। आप में से हर एक स्टूडेंट यूनिक और टैलेंटेड है। इंडिया तभी सक्सीड होगा जब आप लोग सक्सीड होंगे। इसलिए देश की यह ड्यूटी है कि वह हर एक युवा और स्टूडेंट को प्रोटेक्ट करे।

आंकड़ों का हवाला देते हुए इस बात को रेखांकित किया गया कि अकेले नीट, जेईई, यूपीएससी, एसएससी और रेलवे जैसी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर देश के परिवारों की जेब से हर साल करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए जाते हैं। केवल नीट की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के परिवार हर साल करीब 1.32 लाख करोड़ रुपए खर्च करते हैं, जबकि देश का कुल शिक्षा बजट ही लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपए है। लाखों रुपए फूंकने और सालों-साल घिसने के बाद भी परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं है। युवाओं के हाथ में पेपर लीक, धांधली, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के अलावा कुछ नहीं आता। राहुल गांधी ने कहा कि आज मैं यहाँ जो कुछ भी प्रेजेंट कर रहा हूँ, वह पूरी तरह से डेटा और सच्चाई पर आधारित है। मुझे 100% पूरा भरोसा है कि देश की कोई भी राजनीतिक पार्टी, कोई भी नेता या कोई भी छात्र इस सच को ठुकरा नहीं सकता, क्योंकि यह पूरी तरह से सच है।

म्यूजिक कॉन्सर्ट के जोश के बीच गूंजी बदलाव की मांग

इस ऐतिहासिक छात्र संवाद की शुरुआत बेहद धमाकेदार अंदाज में हुई थी। मुख्य कार्यक्रम से पहले आयोजित म्यूजिक कॉन्सर्ट में मशहूर पॉप सिंगर लश्करी और कर्मा की धुनों पर हजारों छात्र-छात्राएं जमकर झूमे। लेकिन जैसे ही राहुल गांधी मंच पर आए, यह युवाओं का जोश एक गंभीर वैचारिक आंदोलन में बदल गया। राहुल गांधी ने खुद छात्रों को मंच पर बुलाकर उनसे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ी, आसमान छूती फीस और कोचिंग के कारण होने वाले मानसिक तनाव पर सीधे सुझाव मांगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए युवाओं की राय सबसे ज्यादा मायने रखती है।

कोटा से ही क्यों शुरू हुआ यह राष्ट्रव्यापी शंखनाद?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देश की सबसे बड़ी कोचिंग नगरी होने और हर साल लाखों छात्रों की उम्मीदों का केंद्र होने के कारण इस अभियान के लिए कोटा को चुनना बेहद रणनीतिक है। हाल के दिनों में पेपर लीक और छात्र आत्महत्याओं के मामलों ने कोटा को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था। इसके अलावा यह इलाका लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संसदीय क्षेत्र भी है, जिससे इस आंदोलन का सियासी संदेश और बड़ा हो जाता है।

चार्टर विमान से कोटा पहुंचे राहुल गांधी का कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, सचिन पायलट और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भले ही कांग्रेस इस आयोजन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक और विशुद्ध रूप से छात्रों के हक की आवाज बता रही हो और भाजपा इसे राजनीतिक स्टंट कह रही हो; लेकिन कोटा के दशहरा मैदान में उमड़ी छात्रों की यह गूंज साफ गवाही दे रही है कि आने वाले समय में देश की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा ‘शिक्षा, रोजगार और परीक्षा की शुचिता’ ही होने वाला है। राहुल गांधी ने युवाओं से इस अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान करते हुए कहा कि कोटा से शुरू हुई यह आवाज देशभर में एक बड़े बदलाव की बुनियाद रखेगी।

Pramukh Samvad

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