Written by : Sanjay kumar
धौलपुर, 24 जून। धौलपुर नगर परिषद में कथित रिश्वतखोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में नगर परिषद के कार्यवाहक आयुक्त एवं अधिशाषी अभियंता गुमान सिंह सैनी एक व्यक्ति से कमीशन की राशि लेते और नकदी गिनते हुए दिखाई देने के बाद राजस्थान सरकार ने उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
वायरल वीडियो बना कार्रवाई का आधार
मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो में गुमान सिंह सैनी एक व्यक्ति से कमीशन की रकम पर बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में उन्हें नकदी गिनते हुए भी देखा गया है। आरोप है कि यह राशि करीब 32 हजार रुपये की थी, जिसे कमीशन के रूप में लिया गया था। वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया और प्रशासन हरकत में आया।
स्वायत्त शासन विभाग ने किया निलंबित
राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने राजस्थान सिविल सेवा नियम, 1958 के तहत कार्रवाई करते हुए गुमान सिंह सैनी को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय स्थानीय निकाय विभाग निदेशालय, जयपुर निर्धारित किया गया है। विभागीय स्तर पर भी मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
जिला प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
धौलपुर जिला कलक्टर श्रीनिधि बी.टी. ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर परिषद के कार्यवाहक आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार मनियां के अधिशासी अधिकारी विष्णु परमार को सौंप दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
गुमान सिंह ने आरोपों को बताया निराधार
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गुमान सिंह सैनी ने वायरल वीडियो को फर्जी बताते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि संबंधित फर्म भुगतान के लिए दबाव बना रही थी और वीडियो वायरल करने की धमकी दे रही थी। उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की है।
नगर परिषद पहले भी रह चुकी है विवादों में
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में एसीबी ने नगर परिषद धौलपुर के पांच कर्मचारियों को 3.10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया था। उस कार्रवाई के बाद भी परिषद में भ्रष्टाचार को लेकर कई सवाल उठे थे। तब से परिषद में स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं हो सकी और पद का अतिरिक्त प्रभार अधिकारियों के पास रहा।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
वायरल वीडियो और निलंबन की कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस प्रकरण ने एक बार फिर सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।
