कोटा में पहली बार ऐतिहासिक सामूहिक पितृदोष निवारण महायज्ञ का आयोजन; 250 विद्वान पंडित कराएंगे अनुष्ठान

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 7 जून। हाड़ौती क्षेत्र के अंतर्गत शिक्षा की काशी कहे जाने वाले कोटा शहर में पहली बार सामूहिक पितृदोष निवारण और पितृ तर्पण महायज्ञ ‘पितृ कृपा समागम’ का भव्य आयोजन 14 जून दिन अमावस्या अधिक मास, छप्पन भोग स्थल कोटा पर होने जा रहा है। श्री बालाजी अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष वास्तुशोध संस्थान (रजि.) द्वारा आयोजित किया जा रहा यह दसवां महायज्ञ है। इससे पूर्व संस्थान द्वारा जयपुर के गलता तीर्थ सहित नौ विभिन्न स्थानों पर सफल आयोजन किए जा चुके हैं, जिसे ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में भी दर्ज किया जा चुका है।
इस वृहद् धार्मिक अनुष्ठान के संबंध में आज पोस्टर विमोचन कार्यक्रम का आयोजन कर सनातन धर्म प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की गई।

स्वाहा नहीं, ‘स्वधा’ की गूंज से तृप्त होंगे पितर

संस्थान के पदाधिकारियों के अनुसार, इस महायज्ञ में ‘स्वाहा’ के स्थान पर विशेष रूप से ‘स्वधा’ मंत्र की गूंज होगी। शास्त्रों के अनुसार, पुरुष प्रधान कहे जाने वाले इस अनुष्ठान में अकेला पुरुष बैठ सकता है, लेकिन महिला अकेले नहीं बैठ सकती। जिन महिलाओं के पति का स्वर्गवास हो चुका है, वे अपने बेटे या परिवार के किसी प्रतिनिधि पुरुष के माध्यम से यह पूजन संपन्न करवा सकती हैं।

पितृदोष के लक्षण और शास्त्रों में प्रमाण

जन्मपत्रिका में सूर्य ग्रह के राहू और केतु के प्रभाव में आने से पितृदोष का निर्माण होता है। इसके प्रभाव के कारण बनते हुए कार्य बिगड़ने लगते हैं, व्यापार में अस्थिरता, संतान सुख की कमी, वंश वृद्धि का रुकना और वैवाहिक कार्यों में रुकावटें जैसी समस्याएं आती हैं। इसका स्पष्ट प्रमाण वृहत पाराशर शास्त्र और याज्ञवल्क्य स्मृति जैसे ग्रंथों में मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, जब तक वेदोक्त रीति से तर्पण क्रिया संपन्न नहीं होती, तब तक किसी भी अन्य पूजा-पाठ का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। भगवान श्री राम ने भी अपने वनवास काल के दौरान पितरों की संतुष्टि के लिए तर्पण कर्म किया था।

अधिक मास की अमावस्या पर विशेष आयोजन

संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य गणपति मिश्र ने बताया कि अधिक मास की अमावस्या के विशेष पर्व पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को वेदोक्त रीति से संपन्न कराने के लिए 250 विद्वान पंडित उपस्थित रहेंगे। इस दौरान ब्रह्म गायत्री जप, गीता पाठ और वेद मंत्रों का पाठ किया जाएगा। यह अनुष्ठान कोटा में चंबल नदी के किनारे संपन्न होगा, जिसके तटों पर कभी भगवान परशुराम ने तपस्या की थी।

भामाशाहों के सहयोग के बिना, न्यूनतम खर्च पर आयोजन

श्री रामलला अयोध्या सेवा समिति, अयोध्या धाम के अध्यक्ष और वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई को देखते हुए आम जनता के कल्याण के लिए इस अनुष्ठान को न्यूनतम खर्च में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्य में किसी भी भामाशाह (दानदाता) का धन सहयोग के रूप में इसलिए नहीं लिया जाता क्योंकि शास्त्रों के अनुसार पराए धन से किया गया पितृ पूजन फलदायी नहीं होता है।

प्रमुख सहयोगियों की उपस्थिति

पोस्टर विमोचन के अवसर पर समाज के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री का आभार व्यक्त किया। इस दौरान जगमोहान, लोकेश गौतम, विशाल शर्मा, अनिल गौतम सुरेली, मनीष शर्मा, संजय गौतम, राजेंद्र मोहन गौतम, नन्द किशोर शर्मा दलाल, प्रवीण पंचोली, मनमोहन शर्मा सहित सर्व समाज के पदाधिकारी और सनातन धर्म के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यह आयोजन 14 जून, दिन अमावस्या स्थान छप्पन भोग स्थल, किशोर पुरा, कोटा में संपन्न होगा, जिसका मुख्य प्रशासनिक कार्यालय अलंकार प्लाजा, विद्याधर नगर, जयपुर में स्थित है।

Pramukh Samvad

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