Written by : प्रमुख संवाद
कोटा / कनवास, 30 जून, 2026
साम्प्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और रूहानी अकीदत के प्रतीक हज़रत सूफ़ी बाबा अब्दुल गफ़ूर शाह साहब नक्शबन्दी का 19वाँ सालाना उर्स इस वर्ष आगामी 08 जुलाई को कनवास में पूरी अकीदत और शिद्दत के साथ मनाया जाएगा। यह धार्मिक व रूहानी आयोजन दरगाह के गद्दीनशीन हाजी हाफ़िज़ सूफ़ी अब्दुल हकीम (बाबा साहब) की पावन सरपरस्ती में संपन्न होगा। उर्स के गरिमामयी आयोजन को लेकर तैयार किए गए अधिकारिक पोस्टर का विमोचन आज गद्दीनशीन बाबा साहब के करकमलों द्वारा दरगाह परिसर में संपन्न हुआ।
आयोजन समिति के सदर अब्दुल आसिफ खान ने उर्स के कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 08 जुलाई को सुबह 11:00 बजे कुरआन ख्वानी के साथ उर्स का आगाज़ होगा। इसके पश्चात ज़ोहर की नमाज़ के बाद महफ़िल-ए-मिलाद का मुकद्दस प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा। असर की नमाज़ के बाद फ़ातिहा ख्वानी होगी, जिसके तुरंत बाद लंगर (प्रसादी) का आगाज़ होगा।
शाम 7:00 बजे दरगाह शरीफ पर भव्य जुलूस के रूप में पारंपरिक ‘चादर शरीफ़’ पेश की जाएगी। इस रूहानी जुलूस में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, मुम्बई, कोटा, कैथून और सम्पूर्ण हाड़ौती संभाग से बड़ी संख्या में ज़ायरीन (श्रद्धालु) शिरकत कर मन्नतें मांगेंगे। समिति ने बताया कि हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी उर्स में सभी धर्मों के श्रद्धालुओं की व्यापक भागीदारी की उम्मीद है, जो कौमी एकता को और मज़बूत करेगी।
शुद्ध शाकाहारी लंगर का विशेष आयोजन: सर्वधर्म समभाव और सभी समाजों के श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दरगाह कमेटी द्वारा विशुद्ध शाकाहारी प्रसादी (लंगर) का भव्य आयोजन किया गया है, ताकि हर वर्ग का व्यक्ति बिना किसी संकोच के प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठा सके।
बालिका शिक्षा और मानवता का संदेश: सदर अब्दुल आसिफ खान ने बताया कि बाबा साहब का मुख्य उद्देश्य समाज में साम्प्रदायिक सद्भाव, भाईचारा, अमन और शांति स्थापित करना है। सूफी सन्तों की यही सीख रही है कि मानवता ही हमारा सबसे बड़ा पैगाम है। इस अवसर पर गद्दीनशीन सूफी अब्दुल हकीम बाबा साहब ने विशेष रूप से बालिका शिक्षा पर ज़ोर देते हुए संदेश दिया कि एक सुशिक्षित महिला ही सुदृढ़, सभ्य और आदर्श समाज का निर्माण कर सकती है।
उर्स के इस पावन पर्व को भव्य और सफल बनाने के लिए आयोजन समिति के पदाधिकारी और समाज के प्रबुद्ध जन दिन-रात पूरे उत्साह से जुटे हुए हैं।
